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मुंबई मंथन: आजतक के मंच पर जुटे राजनीति, सिनेमा और खेल के दिग्गज

मुंबई मंथन 2018 का समापन हो चुका है. मुंबई में आजतक के इस महामंच पर राजनीति, खेल और फिल्मी दुनिया की कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की. पढ़ें पूरी अपडेट...

मुंबई मंथन 2018 मुंबई मंथन 2018

मुंबई मंथन 2018 का समापन हो चुका है. मुंबई में आजतक के इस महामंच पर राजनीति, खेल और फिल्मी दुनिया की कई मशहूर हस्तियों ने शिरकत की. पढ़ें पूरी अपडेट...

बारहवां सत्र: क्रिकेट में अब महिलाओं की बारी

मुंबई मंथन आजतक के बारहवें और आखिरी सत्र में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की युवा क्रिकेटर जेमिमा रॉड्रिग्ज, अनुभवी स्पिनर एकता बिष्ट और बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने शिरकत की.

भारतीय टीम की सदस्य स्मृति ने कहा कि टीम में युवा खिलाड़ियों के आने से नया जोश आता है. हालांकि टीम और स्पोर्ट्स में रैगिंग के सवाल पर जेमिमा ने कहा कि ऐसा मेरे साथ कुछ भी नहीं हुआ. स्मृति ने कहा कि हम हमेशा नए और युवा खिलाड़ियों को पूरा सम्मान देते हैं.

जेमिमा ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि शुरू में मैंने कुछ दिन हॉकी भी खेली और उससे भी काफी सीखने को मिला है. पहाड़ी इलाके से आने वाली एकता ने बताया कि उन्होंने भी क्रिकेट एक छोटे से मैदान से ही शुरू किया था. भारतीय टीम आगे वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलेगी और उसके बाद टी-20 विश्व कप में दम दिखाने उतरेगी.

भारतीय महिल टीम की तैयारियों पर स्मृति मंधाना ने कहा कि हम हमेशा खेल के फॉर्मेट के हिसाब से खुद को ढालते हैं. टी-20 क्रिकेट में आक्रामक रुख दिखाना पड़ता है. जेमिमा ने कहा कि बीते श्रीलंका दौरे में कोच रमेश पवार से काफी मदद मिली. पाकिस्तान के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करने वाली एकता बिष्ट ने बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ जीतने की जिद होती है, बाकी टीमों के खिलाफ भी यही रवैया रहता है लेकिन पाक के खिलाफ जीत का जिम्मा ज्यादा बढ़ जाता है.

टी-20 विश्व कप की तैयारियों पर तीनों खिलाड़ियों ने भारत की जीत का भरोसा जताया और कहा कि हमारी टीम काफी मजबूत है, इसलिए टीम बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार है. सत्र के समापन पर जेमिमा ने गिटार प्ले किया और गाने भी गाए.

पुरुष टीम के बराबर हो फीस?

स्मृति मंधाना ने महिला क्रिकेटर्स की आईपीएल लीग शुरू करने पर कहा कि अगर यह लीग होती है तो जरूर इसका फायदा मिलेगा. लेकिन हमारा ध्यान अभी टी-20 विश्व कप पर ही है. एकता का भी कहना है कि अगर महिला क्रिकेटर के लिए आईपीएल शुरू होता है तो इससे नए टैलेंट को मौका जरूर मिलेगा.

पुरुष और महिलाओं क्रिकेटर्स की फीस में फर्क के सवाल पर मंधाना ने कहा कि विश्व कप के बाद हमारा करार बीसीसीआई ने बढ़ाया है. उन्होंने आगे कहा कि बोर्ड ज्यादा पैसा पुरुष टीम के मैचों से कमाता है और इसीलिए उनकी फीस भी हमसे ज्यादा है. स्मृति ने कहा कि अगर लोग हमारे मैच देखने मैदान पर आएंगे तो बोर्ड हमारी भी फीस बढ़ा सकता है और हम भी उसकी मांग कर सकते हैं. लेकिन उसके लिए पहले हमें अपने गेम में और सुधार लाने की जरूरत है.

ग्यारहवां सत्र: सत्र फूट डालों और राज करो

मुंबई मंथन आजतक के ग्यारहवें अहम सत्र फूट डालों और राज करो में बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा, कांग्रेस नेता संजय निरुपम और समाजवादी पार्टी नेता अबु आसिम आजमी ने शिरकत की.

इस सत्र के दौरान संबित पात्रा ने कहा कि इस देश में हिंदुओं को गलत रंग में दिखाया गया और अच्छा हिंदू और गंदा हिंदू का भेद किया गया है. वहीं सॉफ्ट हिंदुत्व के सवाल पर संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस मीडिया के दिए इस शब्द सॉफ्ट हिंदुत्व में विश्वास नहीं रखती.

निरुमप ने कहा कि आजादी के समय सावरकर और जिन्ना ने राष्ट्रियता को धर्म के आधार पर देखने की कोशिश की. धर्म के नाम पर पाकिस्तान बन गया और तब कांग्रेस ने कहा कि भारत धर्मनिर्पेक्ष देश के तौर पर आगे चलेगा. इस वक्त से आरएसएस और जनसंघ ने अपनी पहचान धर्म के आधार पर किया और इसकी के चलते वह धर्म के आधार पर फूट डालकर राज करने की कवायद में लगे हैं. अब आरएसएस और बीजेपी इसी नीति के आधार पर राहुल गांधी के मंदिर जाने की खबर को सॉफ्ट हिंदुत्व के तर्ज पर देखने का काम कर रहे हैं.

इस सत्र के दौरान अबू आजमी ने कहा कि वह इस देश में धर्मनिर्पेक्षता के आधार पर ही चलना चाहते हैं. आजादी की लड़ाई दोनों हिंदू और मुसलमान ने साथ मिलकर लड़ी लेकिन जब देश आजाद हुआ तो आरक्षण का प्रावधान किया गयाय और मुसलमान को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया गया.

दसवां सत्र:  2019 के चुनाव- कौन किसके साथ?

मुंबई मंथन आजतक के दसवें अहम सत्र 2019 के चुनाव- कौन किसके साथ में शिवसेना सांसद अरविंद सावंत, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी सीएम छगन भुजबल और महाराष्ट्र सरकार ने वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन राजदीप सरदेसाई ने किया.

इस सत्र में शिवसेना अरविंद सावंत नेता ने कहा कि यदि बीजेपी के हुए साझा कार्यक्रम पर काम नहीं किया जा रहा है तो उसकी आलोचना करना हमारी पार्टी का हक है. लेकिन सिर्फ विरोध करने के नाम पर हमें बीजेपी का दुश्मन करार नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि हम गठबंधन में हैं और हमारी आलोचना मित्रवत है.

सावंत ने 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ गठबंधन के सवाल पर कहा कि 2014 में लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियां एक साथ लड़ी लेकिन विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा है. वहीं 2019 में गठबंधन की संभावना पर राउत ने कहा कि इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगी. सावंत ने कहा कि 2014 के आम चुनावों के बाद से शिवसेना हर चुनाव अकेले लड़ी है और मौजूदा समय में अकेले चुनाव लड़ने की बात चल रही है.

वहीं शिवसेना के गठबंधन पर बीजेपी नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री सुधीर ने कहा कि मुनगंटीवार ने कहा कि जब अलग-अलग पार्टियां मिलकर सरकार चलाती हैं तब उन पार्टियों का हर मुद्दे पर एकमत होना जरूरी नहीं है. बीजेपी की कोशिश है कि सरकार पर शिवसेना की टीका-टिप्पणी न हो लेकिन हम इन बातों से दूर रहने की कोशिश करते हैं. बीजेपी ने कहा कि उसकी कवायद है कि आने वाले चुनावों में दोनों पार्टी एक साथ रहें और गठबंधन करें.

बीजेपी-शिवसेना के आपसी तालमेल पर अशोक चव्हाण ने कहा कि यह दोनों पार्टियों की चाल है और एक पक्ष की बात करता है दूसरा विपक्ष की भूमिका में रहने की बात करते हैं. चव्हाण ने कहा कि बीजेपी-शिवसेना की सरकार का नुकसान राज्य की जनता को मिल रहा है.

एनसीपी नेता छगन भुजबल ने कहा कि राज्य की जनता बीजेपी-शिवसेना सरकार के खिलाफ है इसलिए एनसीपी की कोशिश कांग्रेस और अन्य पार्टियों के साथ जाने की कोशिश रहेगी.

नौवां सत्र: कहां गया सेन्स ऑफ ह्यूमर

मुंबई मंथन आजतक के नौवें अहम सत्र कहां गया सेन्स ऑफ ह्यूमर में शेखर सुमन और राजू श्रीवास्तव ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन निधि अस्थाना ने किया.

राजू श्रीवास्तव ने कहा है कि कॉमेडी का विकास भी हुआ है और नाश भी हुआ है. सबके पास स्मार्टफोन में जोक्स आते हैं और लोग मुस्कुरा देते हैं और ठहाके खत्म हो गए हैं. हाई क्लास सोसाइटी के लोग खुलकर नहीं हंसते. हां उनसे ताकतवर कोई है तो वे जरूर हंसते हैं. मैंने कुछ दिनों पहले सेना के लिए जोक सुनाए तो वहां पहले जनरल हंसते थे और बाद में जवान हंसते थे.

लोगों को लगता है कि विलेन खुलकर हंसते हैं इसलिए हंसना सभ्य नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है, लोगों को हंसना चाहिए. जब नकली हंसी ही फायदेमंद है तो असली हंसी कितना फायदा दे सकती है.

शेखर सुमन ने कहा कि पहले के ह्यूमर में गहराई थी. उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि पहले ह्यूमर मेरा पेइंग गेस्ट था, अब पता नहीं कहां गया. इस पर राजू श्रीवास्तव ने कहा कि हां- मेरा भी पड़ोसी था. अब लापता हो गया है. शेखर ने कहा कि अब ह्यूमर खुद तनावग्रस्त हो गया है. उन्होंने आहे कहा कि पहले हम रामलीला में सभी चरित्रों पर मजाक करते थे, अब किसी को भी बुरा लग जाता है. पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी मुझसे कहते थे कि उनके बारे में टीका-टिप्पणी किया करो.

कॉमेडी शो का स्वरूप बिगड़ रहा है, इस सवाल पर शेखर सुमन ने कहा कि अगर किसी को जबरन हंसाना पड़ता है तो उस काम में सोच शामिल नहीं होती है. इसपर राजू श्रीवास्तव ने कहा कि आजकल अंग्रेजी वाले हास्य कलाकार डबल मीनिंग बात करते हैं, उन्हें लगता है कि उनका दर्शक सब सह सकता है.

शेखर सुमन ने कहा कि पहले समाज ज्यादा पढ़ा-लिखा था, सभ्य था. शरद जोशी, हरिशकर परसाई और राही जी ने लिखा तो लोगों ने उसे सराहा. आजकल उन्हें कोर्ट केस लड़ना पड़ता. समाज से जहनियत गायब हो जाती है और फूहड़ता आती है तो ह्यूमर खत्म होने लगा है.

आठवां सत्र: चार साल कितना कमाल

मुंबई मंथन आजतक के आठवें अहम सत्र चार साल कितना कमाल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिरकत की.

देवेंद्र फडणवीस ने शरद पवार के बयान कि अगले साल बीजेपी न तो केन्द्र में रहेगी और न ही राज्य में पर कहा कि महाराष्ट्र में हुए सभी चुनावों में एनसीपी गायब है. फडणवीस ने दावा किया कि पिछले चुनाव की तरह एक बार फिर यूपी के बाद एनडीए को सबसे ज्यादा सीटें महाराष्ट्र से मिलेगी.

बीजेपी-शिवसेना गठबंधन पर फडणवीस ने कहा कि दोनों पार्टियां एक साथ हैं तभी राज्य में सरकार चल रही है. जो राजनीति की समझ रखते हैं उन्हें पता है कि बीजेपी और शिवसेना को एक साथ चुनाव लड़ना चाहिए. वहीं क्या शिवसेना विपक्ष की भूमिका में है के सवाल पर फडणवीस ने कहा कि दिल्ली में बैठे लोग सामना में लेख पढ़कर और यहां के नेताओं के बयान पर अपनी राय बना लेते हैं लेकिन वास्तविक राजनीति इन बयानों से इतर है.

वहीं राम मंदिर के मुद्दे पर फडणवीस ने कहा कि राम मंदिर का मुद्दे को लोगों को समझने की जरूरत है. राम मंदिर का निर्माण 6 दिसंबर 1992 को हो चुका है. हालांकि फडणवीस ने कहा कि बाबरी मस्जिद को ढहाने का काम किसी पार्टी का नहीं है बल्कि कारसेवकों द्वारा किया गया.

फडणवीस ने कहा कि राज्य में कांग्रेस और एनसीपी का अस्तित्व नहीं है लिहाजा उनसे बीजेपी को किसी तरह की चुनौती का सवाल खड़ा नहीं होता.

मोदी को हटाना मुंगेरी लाल के हसीन सपने जैसा: फडणवीस

फडणवीस ने कहा कि कांग्रेस की राजनीतिक जमीन पूरी तरह से खिसक चुकी है. कांग्रेस के पास कोई काम नहीं है इसलिए वह सुबह-शाम बस पीएम मोदी को हटाने का सपना देखती रहती है. लेकिन कांग्रेस का यह सपना सिर्फ मुंगेरी लाल का हसीन सपना ही हो सकता है.

इलाहाबाद के नाम को बदलकर प्रयागराज करने के सवाल पर फडणवीस ने कहा इसमें कुछ गलत नहीं है. इससे पहले भी मद्रास का नाम चेन्नई और कलकत्ता का नाम कोलकाता किया गया तब किसी को आपत्ति नहीं हुई. अब प्रयागराज के हजारों साल के इतिहास को नकारते हुए क्यों नाम बदलने पर सवाल उठाया जा रहा है. फडणवीस ने दावा किया कि उनक् महाराष्ट्र में भी यदि नाम बदलने का ऐसा कोई मामला सामने आएगा तो वह नाम बदलने से परहेज नहीं करेंगे.

सातवां सत्र: मुंबई 2020

मुंबई मंथन आजतक के सातवें अहम सत्र मुंबई 2020 में बीएससी कमिश्नर अजॉय मेहता और मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर आरए राजीव ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन साहिल जोशी ने किया.

इस सत्र के दौरान बीएमसी के दोनों अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में कैसे मुंबई बदलने जा रही है. अजॉय मेहता ने बताया कि उनके 2034 के फ्यूचर प्लान पर चार अहम विषयों पर फोकस है. पहला मुंबई में लगातार लोगों को रोजगार मिलता रहे और नई नौकरियों का सृजन होता रहे. दूसरा, मुंबई में घर की बड़ी समस्या है. या तो इस शहर में लोग अपने घर में हैं या स्लम में. इस प्लान में लोगों को स्लम से निकाल कर घर ले जाना है. तीसरा, फोकस क्वॉलिटी ऑफ लाइफ पर रहेगा. स्कूल, स्पोर्ट्स, हॉस्पिटल जैसी सुविधा के लिए मुंबई को तैयार किया जाएगा. चौथा, मुंबई की रफ्तार में महिलाओं को बराबर की भागीदारी के साथ-साथ दिव्यांग को वर्कफोर्स में जगह दिलाना है.

मुंबई में मेट्रो की सुविधा पर राजीव ने बताया कि मेट्रो विस्तार का फोकस सिर्फ मुंबई नहीं है बल्कि मुंबई के आसपास के इलाकों को इंटेग्रेट करने की तैयारी हो रही है. वहीं देश का सबसे बड़ा समुद्र सेतु का निर्माण हो रहा है और उसका काम अपनी डेडलाइन पर सही चल रहा है. हालांकि इससे लोगों को कुछ परेशानी हो रही है लेकिन एक बार यह काम खत्म होगा शहर को बहुत बड़ी राहत मिलने जा रही है.राजीव ने कहा कि मेट्रो के इस काम में उन्हें ट्रैफिक विभाग से अच्छा सहयोग मिल रहा है और बिना उनके इस काम को पूरा कर पाना बेहद मुश्किल है.

वहीं मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमत पर अजॉय ने कहा कि जैसे-जैसे मुंबई का विस्तार होगा उतना ही मौजूदा मुंबई रहने लायक हो जाएगी. लोग मुंबई से दूर रहेंगे लेकिन फास्ट पब्लिक ट्रांस्पोर्ट के जरिए वह दूर-दराज के इलकों से रोज काम करने आ सकते हैं. वहीं मुंबई में लगातार प्रॉपर्टी की कीमतों को काबू करने पर अजॉय ने कहा कि किसी स्लम को खत्म करने के लिए उसी जगह पर वर्टिकल प्लान में शिफ्ट करने की जरूरत है क्योंकि स्लम में रहने वाले से आप उम्मीद नहीं कर सकते कि वह मुंबई के बाहर चले जाएं. इस सोशल कॉस्ट के लिए सरकार को तैयार रहने की जरूरत है.

छठवां सत्र: वो भोली दास्तान

मुंबई मंथन आजतक के छठवें अहम सत्र वो भोली दास्तान में अभिनेत्री रवीना टंडन ने शिरकत की.

टिप टिप बरसा पानी की सेन्सेशन रवीना टंडन ने कहा कि आज के दौर में बॉलिवुड में महिलाओं को अधिक सपोर्ट मिल रहा है. हालांकि रवीना ने कहा कि मी टू से पहले भी लोग आवाज उठाते थे लेकिन 90 के दशक में ये आवाज कहीं बिखर गई. हमने उस वक्त और कोशिश की होती तो आज हमें मी टू के लिए अमेरिका के हैशटैग का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती.

रवीना ने कहा कि सोशल मीडिया का सही और गलत दोनों ढंग से इस्तेमाल किया जा सकता है. रवीना ने कहा  कि पहले अखबार या मैगजीन में कोई स्टोरी छप जाती थी तो उसे हटाने का कोई विकल्प नहीं था. फिर मैगजीन और अखबार के खिलाफ यदि आप कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं को फैसला आने में दशकों का समय लग जाता था. वहीं मौजूदा दौर में सबकुछ इंस्टा है.

रवीना ने बताया कि 90 के दौर में काम करना कलाकारों के  लिए इतना आसान नहीं थी. आज चीजें ज्यादा प्रोफेश्नल हो चुकी हैं.

वहीं मी टू पर प्रतिक्रिया देते हुए रवीना ने कहा कि इससे बॉलिवुड की सफाई हो जाएगी और बॉलीवुड महिलाओं के काम करने के लिए और भी अच्छी परिस्तिथियां को अपनाएगा.

पांचवां सत्र: डिजिटल दुनिया के चमकते सितारे

मुंबई मंथन आजतक के पांचवे अहम सत्र डिजिटल दुनिया के चमकते सितारे में सीरियल्स की दुनिया से छवि मित्तल ने शिरकत की. इनके अलावा इस सत्र में चंकी पांडे और एक्टर शमा सिकंदर ने किया. इस सत्र का संचालन अमित त्यागी ने किया.

छवि ने दो साल पहले अपने पति के साथ मिलकर यूट्यूब चैनल की शुरुआत की. इस चैनल का नाम मेड इन हैवन है. सोशल मीडिया और इंटरनेट की  दुनिया में कदम रखने के बाद अपने एक्सपीरिएंस को मुंबई मंथन के मंच पर साझा किया. छवि ने कहा कि उन्हें बॉलिवुड से ज्यादा डिजिटल की दुनिया के लिए काम करना पसंद है.

वहीं सत्र के दौरान अपने वेब सिरीज बेबी कम ना पर चंकी पांडे ने कहा कि एकता कपूर के इस प्रोडक्शन में काम कर उन्हें बहुत अच्छा लगा.

वेब सिरीज पर शमा ने कहा कि अब वेब ने काम करने की आजादी दी है. लोग जिस मुद्दे को भी छूना चाहते हैं वह पूरी तरह से स्वतंत्र हैं. वेब पर इतनी बड़ी संख्या में ऑडियंस की मौजूदगी बेहद अहम है.

वेब में रोजगार पर चंकी ने कहा कि मोबाइल आज सबसे बड़ा हथियार बन चुका है. मोबाइल ने लोगों को पावर दिया है और कोई भी व्यक्ति कुछ भी कंटेंट बना सकते हैं और उसमें क्वॉलिटी है तो दर्शक देखने के लिए तैयार बैठे हैं.

चौथा सत्र: #MeToo

मुंबई मंथन आजतक के चौथे अहम सत्र #MeToo में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन राजदीप सरदेसाई ने किया.

नाना पाटेकर के खिलाफ मी टू मुहिम में शामिल होने के सवाल पर तनुश्री दत्ता ने कहा कि नाना के खिलाफ उन्होंने दस साल पहले आवाज उठाई लेकिन उसे सुनी नहीं गई. अपनी आवाज को नजरअंदाज होता देख उन्हें मायूसी हुई.

तनुश्री ने कहा कि वेस्ट में शुरू हुए मी टू मूवमेंट का प्रभाव भारत तक भी पहुंचा. तनुश्री ने कहा कि भारतीय समाज भी लगातार बदल रहा है लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में भारत में ऐसी महिलाएं हैं जो दबाव के चलते बोलने की हिम्मत नहीं उठा पा रही हैं. लेकिन धीरे-धीरे हो रहे बदलाव से एक दिन जरूर देश उस आदर्श स्थिति में पहुंच जाएगा जिसकी हमने कल्पना की है.

तनुश्री ने कहा कि यदि संस्था में किसी सीनियर के खिलाफ शिकायत होती है तो उसकी जांच का जिम्मा उस संस्था के पास नहीं होना चाहिए. लिहाजा तनुश्री ने कहा कि ऐसे मामलों में एक स्वतंत्र जांच कमेटी की आवश्यकता है जो केन्द्र अथवा राज्य सरकार के प्रति जवाबदेह हो.

सत्र के दौरान मी टू मूवमेंट से पुरुषों में व्यापत डर पर तनुश्री ने कहा कि यह अच्छी बात है कि समाज में इस मूवमेंट के चलते पुरुष डरे हुए हैं. बराबरी के लिए बदलाव की शुरुआत अच्छी है.

तीसरा सत्र: भागवत की बात मानेंगे मोदी?

मुंबई मंथन आजतक के तीसरे अहम सत्र भागवत की बात मानेंगे मोदी में असदुद्दीन ओवैसी, आध्यक्ष एआईएमआईएम और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने शिरकत की.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि राम मंदिर बनाने की पहल की जानी चाहिए. इस सत्र में शाहनवाज ने कहा कि मोहन भागवत का देश में महत्व है. शाहनवाज ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह मामला है लिहाजा या तो अदालत के जरिए या आपनी बातचीत के जरिए इस मामले में कोई रास्ता निकले. शाहनवाज ने कहा कि यह देश का सबसे बूढ़ा मुकदमा है लिहाजा जल्द से जल्द इस मामले की हल निकलना चाहिए.

वहीं ओवैसी ने कहा कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में मुसलमान असुरक्षित है. ओवैसी ने कहा कि आरएसएस एक सामाजिक संस्था है और उसे क्या हक है कि वह सरकार को या किसी राजनीतिक दल को किसी तरह का निर्देश देने का काम करे. ओवैसी ने कहा कि बीजेपी और आरएसएस ने जुगलबंदी में देश के महत्वपूर्ण मुद्दों को बहस से दूर रखने का काम किया है.

शाहनवाज ने कहा कि ओवैसी जी की पार्टी का नाम से ही निहित है कि वह दिंदुस्तान की पार्टी के अध्यक्ष है. वहीं राम मंदिर इस देश में करोड़ों की आस्था का  सवाल है तो क्या राम मंदिर को किसी दूसरे देश में बनाने पर बहस की जाएगी?  वहीं राम मंदिर पर अध्यादेश के सवाल पर शाहनवाज ने कहा कि किसी तरह के अध्यादेश को लाने की  जानकारी उनके पास नहीं है. वहीं कानून बनाने की बात पर शाहनवाज ने कहा कि राम मंदिर बीजेपी के लिए चुनाव की जगह आस्था का मुद्दा है.

सत्र के दौरान तीखी बहस में ओवैसी ने कहा कि हिंदू माओं के पेट से ही देश के मुगल बादशाहों ने जन्म लिया है. वहीं बीजेपी सरकार को ताजमहल बनाने की ओवैसी की चुनौती पर शाहनवाज ने कहा कि मोदी सरकार ताजमहल बनवाने में विश्वास नहीं रखती. शाहनवाज ने कहा कि मोदी सरकार देश में गरीबों का मकान बनवाने का काम कर रही है.

बहस के दौरान ओवैसी ने शाहनवाज को हैदराबाद से उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी. इस चुनौती पर शाहनवाज ने कहा कि यदि उनकी पार्टी इजाजत देगी तो वह ओवैसी की चुनौती पर हैदराबाद से चुनाव लड़ने के लिए तैयार है.

दूसरा सत्र: कितना सुरक्षित है महाराष्ट्र?

मुंबई मंथन आजतक के दूसरे अहम सत्र कितना सुरक्षित है महाराष्ट्र में महाराष्ट्र के एमओएस होम दीपक वसंत केसारकर और महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री जयंत पाटिल ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन साहिल जोशी ने किया.

इस सत्र के दौरान जयंत पाटिल ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में क्राइम का ग्राफ साफ दिखा रहा है कि महाराष्ट्र में बीते तीन-चार साल के दौरान बेहद खराब हुई है. वहीं पाटिल ने कहा कि देश में बीजेपी सरकार बनने के बाद दंगे के संख्या उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सर्वाधिक है.

वहीं दीपक वसंत केसरकर ने कहा कि सबसे ज्यादा दंगे गणपति या नवरात्रि के दौरान होते थे लेकिन बीते कुछ वर्षों के दौरान इस दौरान एक भी दंगा नहीं हुआ है. वहीं कांग्रेस के आरोप पर केसरकर ने कहा कि भीमा कोरेगांव पर न्यायिक जांच हो रही है लिहाजा इसपर टिप्पणी नहीं करना चाहिए.  इस मामले में सरकार ने जो भी निर्णय लिए हैं उनसे स्थिति को काबू करने में सफलता मिली है.

इस सत्र के दौरान प्रधानमंत्री की हत्या की कोशिश के मामले पर पाटिल ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है. लेकिन राज्य सरकार किसी भी मामले में दबाव बनाने की कोशिश करती है, पहले किसी भी मुद्दे का प्रचार करते हैं फिर कोर्ट का दरवाजा भी खुद जाकर खटखटा देती है.

पहला सत्र: कैसा होगा महागठबंधन

#MumbaiManthan18: 2019 में होगा परिवर्तन, मोदी नहीं होंगे PM: पवार

मुंबई मंथन आजतक के पहले अहम सत्र में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने शिरकत की.

शरद पवार ने कहा कि 2019 के चुनावों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा. शरद पवार ने कहा कि आगामी चुनावों में देश की जनता परिवर्तन चाहती है और संभव है कि देश में गठबंधन की सरकार बनने जा रही है. मुंबई मंथन कं मंच से एनसीपी नेता शरद पवार ने कहा कि पीएम मोदी अपनी पार्टी के सबसे ताकतवर नेता हैं लेकिन उन्हें देश का सबसे ताकतवर मानने की भूल नहीं करनी चाहिए.

वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार के सवाल पर पवार ने कहा कि मोदी का व्यक्तित्व पूर्व बीजेपी नेता अटल बिहारी वाजपेयी की तरह नहीं है. देश बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

वहीं राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पहले साफ कर चुके हैं. कांग्रेस देश में बदलाव चाहती है और वह प्रधानमंत्री पद पर किसी शर्त के साथ परिवर्तन नहीं देख रही है.

मायावती और महागठबंधन के सवाल पर पवार ने कहा कि उनकी पार्टी ने कभी महागठबंधन की बात नहीं की है. मौजूदा स्थिति में गैर बीजेपी दलों के एकजुट होने की स्थिति को पवार ने नकारते हुए कहा कि अलग-अलग राज्यों में बीजेपी के विरोध में अलग-अलग पार्टियां खड़ी रहेंगी. वहीं महाराष्ट्र में एनसीपी और कांग्रेस एक साथ आएगी और बीजेपी राज्य में दूसरे नंबर की पार्टी रहेगी.

राजस्थान और मध्यप्रदेश में बीजेपी को हार मिलेगी

राजस्थान में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलेगा. राजस्थान और मध्यप्रदेश में बीजेपी की हार की संभावना है.

पवार ने एक बार फिर कहा कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों को एकजुट होकर बीजेपी के विरोध में आना चाहिए लेकिन जरूरी नहीं कि इसके लिए किसी तरह का राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बने. पवार ने कहा कि दुनियाभर में गठबंधन का दौर है. फ्रांस के साथ-साथ यूरोप के कई देशों में गठबंधन का दौर चल रहा है.

वहीं मोदी के विरोध की राजनीति के सवाल पर पवार ने कहा कि 2014 में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला लेकिन उससे पहले बीजेपी सिर्फ गठबंधन के जरिए सरकार में आने की कोशिश करती रही. मोदी से पहले अटल जी ने दिखाया कि गठबंधन के साथ भी देश में सरकार को चलाया जा सकता है.

पवार ने कहा कि चुनावों के बाद नतीजों के आधार पर सभी दल एक साथ बैठते हुए एक साझा कार्यक्रम को तय करेंगे और देश में नई सरकार का गठन किया जाएगा. वहीं खुद को बतौर प्रधानमंत्री के तौर पर देखने के सवाल पर शरद पवार ने कहा कि देश में अगला प्रधानमंत्री बनाने में उनकी भूमिका रहेगी.

राफेल पर जेपीसी लाने की जरूरत

राफेल के मुद्दे पर शरद पवार ने कहा कि 1991-92 में रक्षा मंत्री रहते हुए वह फ्रांस गए थे और राफेल की परफॉर्मेंस देखने के बाद उसे रिजेक्ट करने का काम किया था. वहीं पवार ने कहा कि विपक्ष ने जेपीसी की मांग की लेकिन पूछना चाहता हूं कि सरकार ने जेपीसी का गठन क्यों नहीं किया. पवार ने कहा कि बोफोर्स के मामले में जिन लोगों ने जेपीसी की मांग की और संसद नहीं चलने दी आज वह सत्ता में है और जेपीसी बनाने के लिए तैयार नहीं है.

वहीं राफेल में भ्रष्टाचार की संभावना पर पवार ने कहा कि 570 करोड़ रुपये की डील पहले हुई और बाद में इस डील को 1600 करोड़ रुपये में की गई. लिहाजा, कीमत में इतना बड़ा अंतर लोगों को समझ नहीं आ रहा है. देश यदि कीमत को लेकर आशंकित है तो सरकार को इसे दूर करने के लिए जेपीसी का गठन करने की जरूरत है. यदि सत्तारूढ़ पार्टी का मन साफ है तो उसे देश के सामने भी स्थिति स्पष्ट करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

फ्रांस के राष्ट्रपति के बयान पर पवार ने कहा कि उनके ऊपर मार्केटिंग का दबाव है और उनकी मजबूरी अपने देश के प्रोडक्ट को बेचने की है लिहाजा उनसे अधिक उम्मीद नहीं की जा सकती है.

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