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सिक्किम में चीन के साथ तनातनी, केंद्र ने शुरू किया पड़ोसी देशों चीनी निवेश का विश्लेषण

यूएसआई का अध्ययन कहता है कि अगर चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर और वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए है तो चीन को इस पर पुर्नविचार करना चाहिए और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से निवेश को वापस लेना चाहिए. यूएसआई का आगे कहना है कि दिए गए समय के भीतर पाकिस्तान के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के निवेश को चुका पाना संभव नहीं लगता.

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50 बिलियन डॉलर का है चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर
50 बिलियन डॉलर का है चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर

सिक्किम में सीमा पर चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने भारत के पड़ोसी देशों में चीनी विदेश निवेश का पहली बार गहराई से विश्लेषण करना शुरू किया है.

अंग्रेजी अखबार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की ओर से ये प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इसका मुख्य मकसद भारत के सुरक्षा हितों के नजरिए से पड़ोसी देशों में चीन के निवेश का विश्लेषण करना है.

इस प्रोजेक्ट को लेकर कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय सहित सभी संबंधित मंत्रालयों के साथ औपचारिक बैठक पहले ही हो गई है. कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय देश में विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश का लेखा जोखा रखती है.

भारतीय उप महाद्वीप में बढ़ता चीनी दखल

दक्षिण एशिया और भारतीय उप महाद्वीप में चीन के लगातार बढ़ते दखल को देखते हुए यह अध्ययन गतिशील रहने वाला है. पड़ोसी देशों में बढ़ते चीनी निवेश के आकलन के साथ अन्य ट्रेंड्स का भी विश्लेषण किया जाएगा. पाकिस्तान सरकार के डाटा के मुताबिक 2014-15 में चीनी एफडीआई 256.8 मिलियन डॉलर (16 अरब से ज्यादा) था और 2016-17 में यह बढ़कर 878.8 मिलियन डॉलर (56 अरब से ज्यादा) हो गया. पाकिस्तान का वित्त वर्ष जुलाई से जून तक का होता है.

नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि इस अध्ययन में चीनी निवेश के चलते राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का भी विश्लेषण किया जाएगा. इसमें बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत किया जा रहा निवेश भी शामिल होगा. बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को वन बेल्ट वन रोड या ओबीओआर नाम से भी जाना जाता है.

50 बिलियन डॉलर का है CPEC प्रोजेक्ट

अपने रणनीतिक हितों को देखते हुए भारत ने चीन की वन बेल्ट वन रोड नीति पर चिंता जताई है. 50 बिलियन डॉलर का चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरता है.

केंद्र सरकार बांग्लादेश, भूटान, म्यामांर, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में चीनी निवेश की प्रकृति और प्रभाव का भी विश्लेषण करेगी. इसके साथ ही अफगानिस्तान और मालदीव में चीनी निवेश का भी अध्ययन किया जाएगा.

हालांकि इस अध्ययन में सबसे बड़ी बाधा पड़ोसी देशों के सालाना एफडीआई और चीनी एफडीआई का विस्तृत डाटा न होना है.

CPEC से पाकिस्तान को मिलेगा बाजार

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर विश्वजीत धर के मुताबिक चीनी निवेश पाकिस्तान को बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के बाजार में पहुंचा सकता है, जहां वह भारतीय कंपनियों को चैलेंज कर सकता है. इन देशों में भारत एक अहम खिलाड़ी है.  

प्रोफेसर धर कहते हैं कि चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट पाकिस्तान को सेंट्रल एशिया रिपब्लिक्स (CAR) से जोड़ सकता है. इससे पाकिस्तान को इन बाजारों में अपने पांव जमाने में मदद मिल सकती है.

राजनीतिक और रणनीतिक है CPEC

सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज द्वारा 'चीन और दक्षिण एशिया' विषय पर किए गए वर्कशॉप की एक स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका में चीनी राजदूत यी शियानलियांग चीन को कई मायनों में दक्षिण एशिया का हिस्सा मानते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन का मौजूदा सहयोग वन बेल्ट वन रोड नीति का अहम हिस्सा है. हालांकि शियानलियांग इस बात से इंकार करते हैं कि वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट का कोई रणनीतिक या राजनीतिक मकसद है.

रिपोर्ट कहती है कि भारत चीन के स्पष्टीकरण पर विश्वास नहीं करता कि चीन का वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट सिर्फ आर्थिक उद्देश्यों को लेकर चल रहा है. आईएसएएस के संपादक पी.एस. सूर्यनारायण का कहना है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का रणनीतिक मकसद हैं.

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बन रहे कई प्रोजेक्ट

नई दिल्ली स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस सर्विस थिंक टैंक यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) का मानना है कि जहां तक भारत की चिंताओं का सवाल है तो चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर ने इस विषय को पेचीदा बना दिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत भारत की सहमति के बिना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई प्रोजेक्ट बन रहे हैं और यही चीज इस प्रोजेक्ट को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना देती है.

पाकिस्तान का कर्ज न चुका पाना भारी पड़ेगा!

यूएसआई का अध्ययन कहता है कि अगर चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर और वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए है तो चीन को इस पर पुर्नविचार करना चाहिए और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से निवेश को वापस लेना चाहिए. यूएसआई का आगे कहना है कि दिए गए समय के भीतर पाकिस्तान के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर के निवेश को चुका पाना संभव नहीं लगता.

ऐसे में यह कर्जा चीन के लिए यह रणनीतिक हिस्सा बन जाएगा, खास तौर पर ग्वादर बंदरगाह... और इससे दक्षिण एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ जाती है. बता दें कि चीन पाक आर्थिक कॉरिडोर के तहत पोर्ट सेक्टर में ग्वादर बंदरगाह का विकास सबसे महत्वपूर्ण है.

 

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