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नीतीश के NDA में जाने से बदला राज्यसभा का गणित, मजबूत हुई मोदी सरकार

सदन में समन्वय स्थापित करने वाले एनडीए नेताओं के चुस्त राजनीतिक प्रबंधन से उसे कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की चुनौती से सफलतापूर्वक निपटने में मदद मिल सकती है क्योंकि कांग्रेस राज्यसभा में सरकार के विधेयकों को अवरुद्ध करने में अक्सर सफल रही है.

नीतीश कुमार और पीएम मोदी नीतीश कुमार और पीएम मोदी

जेडीयू के बीजेपी से हाथ मिलाने के साथ मैत्रीपूर्ण क्षेत्रीय दलों के समर्थन से एनडीए की संख्या राज्यसभा में बहुमत के काफी करीब पहुंच गई है, जिससे सरकार के विधायी एजेंडे को बढ़ावा मिलेगा. निर्दलीय एवं नामित सदस्यों के अलावा विभिन्न दलों के संख्या बल की गणना से पता चलता है कि मोदी सरकार संसद के 245 सदस्यीय ऊपरी सदन में कम से कम 121 सदस्यों से समर्थन की उम्मीद कर सकती है.

मोदी सरकार के कई विधेयक फंसे

सदन में समन्वय स्थापित करने वाले एनडीए नेताओं के चुस्त राजनीतिक प्रबंधन से उसे कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की चुनौती से सफलतापूर्वक निपटने में मदद मिल सकती है क्योंकि कांग्रेस राज्यसभा में सरकार के विधेयकों को अवरुद्ध करने में अक्सर सफल रही है.

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी के ऊपरी सदन में 10 सदस्य हैं जो अब तक सदन में अल्पमत में रहे सत्तापक्ष में महत्वपूर्ण इजाफा है. जेडीयू के समर्थन के साथ 245 सदस्यीय सदन में एनडीए का संख्या बल बढ़कर 89 हो गया. पार्टी के कुछ सदस्यों ने भाजपा से हाथ मिलाने के नीतीश के फैसले की आलोचना की है लेकिन यह साफ नहीं है कि क्या वह संसद में पार्टी के रुख के उलट काम करेंगे.

123 के बहुमत के आंकड़े के करीब एनडीए

अनिल माधव दवे के निधन से रिक्त हुई मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की जीत तय होने तथा गुजरात में कांग्रेस से एक सीट छीनने के लिए उसके कोई कसर ना छोड़ने के साथ मौजूदा संसद सत्र के दौरान उसका संख्या बल बढ़कर 91 हो सकता है. कुल 26 सदस्यों वाले अन्नाद्रमुक, बीजेडी, टीआरएस, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और आईएनएलडी जैसे क्षेत्रीय दलों ने अक्सर सरकार का समर्थन किया है और साथ ही सरकार आठ नामित सदस्यों में से कम से कम चार पर समर्थन के लिए निर्भर कर सकती है. इन सबको मिलाकर संख्या 121 होती है जो 123 के बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब है.

यूपी-बिहार से बदलेगा समीकरण

अगर बीजेपी उत्तर प्रदेश के नौ में से आठ सीटें जीतती है तो मॉनसून सत्र के दौरान उसके मनोबल को बढ़ावा मिलेगा. इस समय उसके पास केवल एक सीट है हालांकि बिहार में एनडीए की उल्टी गंगा बह सकती है जहां अगले साल मार्च-अप्रैल में छह सीटों के लिए चुनाव होंगे. इस समय जेडीयू और भाजपा के पास क्रमश: चार और दो सीटें हैं. आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन तीन तक सीटें जीत सकता है.

 

 

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