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केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी बोले- जाधव को पाक की जेल से जरूर निकालेंगे

विएना कन्वेंशन है वह देश पर लागू होता है. इस देश में मिलिट्री भी होती है उसमें कार्यपालिका भी होती है संसद भी होती है और न्यायपालिका भी होती है. संधि के नियम सभी पर लागू होते हैं.

कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी

पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की जेल से छुड़वाने के सवाल पर कानून राज्य मंत्री पी पी चौधरी का कहना कि पाकिस्तान से 16 बार विनती की गई थी कि वो जाधव को काउंसलर एक्सेस दे, ताकि पता चला सके कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है. उनसे बात कर ये जाना जाए कि किस प्रकार की ट्रायल हुई है. किस प्रकार से उसे जबरदस्ती कन्फेशन लिया गया. यह सब जानने के लिए ही बार-बार पाकिस्तान से कहा गया.

पी पी चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत की विनती को नहीं माना. विएना संधि में सिगनेटरी होने के कारण काउंसलर एक्सेस भारत का अधिकार है और उस अधिकार को मानने के लिए पाकिस्तान बाध्य है. उसी वजह से अंतरराष्ट्रीय अदालत ने जाधव की फांसी पर रोक लगाई है. पाकिस्तान को यह आधार देना पड़ेगा किस प्रकार से यह सब किया गया है. अगर पाकिस्तान पर विएना संधि लागू है, तो मिलिट्री कोर्ट देश की होती है जब देश पर ही लागू हो जाता है तो मिलिट्री और देश अलग अलग नहीं हो सकते.

राज्य मंत्री पी पी चौधरी का कहना है कि जो विएना कन्वेंशन है वह देश पर लागू होता है. इस देश में मिलिट्री भी होती है उसमें कार्यपालिका भी होती है संसद भी होती है और न्यायपालिका भी होती है. संधि के नियम सभी पर लागू होते हैं. अगर भारत में विएना संधि के नियम लागू हैं तो पाकिस्तान पर भी लागू होते हैं. अगर पाकिस्तान इससे पीछे हटता है तो ये ठीक नहीं है.

'ट्रिपल तलाक पर SC करे फैसला'
तीन तलाक के मुद्दे पर पी पी चौधरी का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ट्रिपल तलाक को निरस्त कर देता है. तो रेगुलेट करने के लिए कितना किस रूप में हो. मैरिज एंड डेवोर्स उसका जो कानून है. अगर सुप्रीम कोर्ट में पोली गेमी के मामले को भी तय करता है. हम तो चाहते हैं कि सारे मामले तय हो जाना चाहिए. अगर पीस मिल में ना हो. क्योंकि मुस्लिम महिलाओं को बहनों को भी समानता का देश में अधिकार है.

उन्होनें आगे कहा कि भारत के सविधान में उनको समानता का अधिकार दिया है. पर्सनल लॉ ने भले ही ना दिया हो की ट्रिपल तलाक पर्सनल लॉ की केटेगरी में आता है. लेकिन आता भी है तो कोई भी पर्सनल लॉ जो है भारत के संविधान के ऊपर नहीं हो सकता. भारत की संविधान की मंशा के खिलाफ नहीं हो सकता. भारतीय संविधान ने जो उसे समानता का अधिकार दिया है. वह जेंडर इनजस्टिस की बातें नहीं करते हैं. जेंडर जस्टिस की बात करता है.

राज्य मंत्री पी पी चौधरी का कहना है कि इसलिए किसी तरह का सुप्रीम कोर्ट आदेश देता है और ट्रिपल तलाक निरस्त करता है. तो ऑर्डिनेंस के द्वार पोलीगेमी और ट्रिपल तलाक को लेकर भारत सरकार कानून ले आएगी, क्योंकि संसद अभी चल नही रही हैं. अभी सुप्रीम कोर्ट ट्रिपल तलाक का मामला मामला और पोलीगेमी, एक से ज्यादा शादियां करने का मामला लंबित है. अगर एक बार ट्रिपल तलाक हो जाए अगर उसी से द्वारा से शादी करना चाहे पहले उसे दूसरे शादी करनी पड़े. वापस उसे द्वारा शादी कर सकते हैं. यह सारे मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है.

उन्होनें आगे कहा कि भारत सरकार का तो मानना यह है कि सारे मामलो पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना दे. ताकि सरकार को एक साथ कानून लाने में सुविधा रहेगी. अगर ट्रिपल तलाक को ही डील किया. तो हम तो सिर्फ तीन तलाक पर ही कानून ला पाएंगे. अगर तीन तलाक और पोली गेमी को एक साथ करें तो मैरिज एंड डाइवोर्स दोनों का एक साथ कमअपोजिट एक कानून आ जाएगा. हमारा मानना तो यह है कि यह समाज के लिए भी मुस्लिम महिला और बेटियों के लिए अच्छा रहेगा.

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