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मीडिया ने हिटलर को पीछे छोड़ दिया: बाल ठाकरे

एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी. मुंबई में एक न्यूज़ चैनल के दफ़्तर में गुंडागर्दी का घटिया नमूना पेश करने के बाद, अब शिवसेना की ख़िसियाहट सामने आई है.

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एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी. मुंबई में एक न्यूज़ चैनल के दफ़्तर में गुंडागर्दी का घटिया नमूना पेश करने के बाद, अब शिवसेना की ख़िसियाहट सामने आई है. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने सामना में लेख लिखकर हमले को जायज़ ठहराया है, साथ ही मीडिया पर अपना ग़ुस्सा उतारा है.

ये दादागीरी की हद नहीं तो और क्या है कि राजनीतिक पार्टी के तौर पर चुनाव लड़ने वाली एक पार्टी के ग़ुंडे, जनता की आवाज़ दबाने की कोशिश करते हैं. न्यूज़ चैनल पर धावा बोलकर उत्पात मचाते हैं और उसी पार्टी के मुखिया हमले को जायज़ ठहराते हुए मीडिया को कोसते हैं.

शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे ने सामना में लिखा है कि मीडिया कोई भगवान नहीं है. आईबीएन लोकमत के दफ़्तर में शिवसेना के हमले के बाद देश भर में जो प्रतिक्रिया हुई, उसकी हताशा इस तरह फूटी है. सामना में बाल ठाकरे ने लिखा है कि  मीडिया की भूमिका अब रामशास्त्र की नहीं बल्कि दामशास्त्र की हो गई है. किसी पार्टी या उसके नेता को बदनाम करके उसे किस तरह हरवाना है, ये काम मीडिया  कर रहा है. मीडिया ने हिटलर को भी पीछे छोड़ दिया है. महाराष्ट्र के मतदाताओं में भ्रम और शक पैदा करने का काम मीडिया ने किया.

शिवसैनिकों की ग़ुंडागर्दी के पीछे शिवसेना ने दलील दी कि सचिन के मामले में आईबीएन लोकमत ने बाल ठाकरे की बात को मुद्दा बनाया. सामना में बाल ठाकरे ने लिखा है कि  हमने सचिन के बारे में कहा कुछ और, मीडिया ने उसे कुछ और बता दिया. तो क्या हमें अपने महाराष्ट्र या मुंबई के  बारे में एक शब्द भी बोलने के लिए मीडिया से पूछना पड़ेगा?

चुनावों में हार से तिलमिलाए बाल ठाकरे की भड़ास, रह-रह कर निकल रही है. उन्होंने सामना में कहा है कि मीडिया के मालिकों में या तो राजनेता हैं या फ़िर कोई अमीर. मराठियों के मुद्दे पर मीडिया के पेट में दर्द उठता है और उनके पाले हुए लोग वो दर्द बाहर निकालने का काम करते हैं. सामना के लेख में बाल ठाकरे ने मीडिया पर अपनी पूरी कुंठा निकाली है कि वे आगे लिखते हैं कि मीडिया चमचागीरी और जी-हुज़ूरी में खो गया है. जहां तक महाराष्ट्र में कांग्रेस-एनसीपी की जीत का सवाल है तो ऐसा ग़लती से हो गया.

आख़िर में बाल ठाकरे ने ये भी कहा है कि आईबीएन लोकमत के दफ़्तर में शिवसैनिकों ने जो किया वो हमला नहीं था, बल्कि उनके ग़ुस्से का उफ़ान था. साफ लगता है कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद शिवसेना बुरी तरह बौखला गई है.

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