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'मीडिया चीन के साथ बढ़ा सकती है दिक्‍कतें'

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने चिंता जतायी कि चीन के घुसपैठ संबंधी खबर को मीडिया में ज्यादा उछाले जाने से ‘अवांछित घटनाएं या हादसे ’हो सकते हैं, जो पड़ोसी देश के साथ समस्या पैदा कर सकता है.

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वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास चीनी सेना द्वारा हालिया घुसपैठ की खबरों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन ने आज इस बात पर चिंता जतायी कि मीडिया में इस मुद्दे को ज्यादा उछाले जाने से ‘अवांछित घटनाएं या हादसे ’हो सकते हैं, जो पड़ोसी देश के साथ समस्या पैदा कर सकता है.

उन्होंने माना कि घुसपैठ होती रही है लेकिन यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां में शायद ही बढ़ोत्तरी हुई है और हालात ‘चिंताजनक’ नहीं है. नारायणन इस बात से असहमत थे कि चीन दबाव डालने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि ‘वर्ष 2009 का भारत 1962 वाला नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र शांति बनाये रखने के इच्छुक हैं.

एनएसए ने एक निजी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि घुसपैठ की संख्या के मामले में शायद ही कोई बढ़त हुई है. मैं ऐसा नहीं सोचता कि वहां कुछ भी चिंताजनक है. मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर हमारी बेहतर समझ है. उन्होंने कहा कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस सवाल इसे मीडिया में इतना ज्यादा बढ़ा चढ़ा कर क्यों पेश किया जा रहा है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या मीडिया की हद से ज्यादा प्रतिक्रिया समस्या पैदा कर सकती है तो उन्होंने कहा कि मैं 1962 के दौर से वाकिफ हूं. मुझे उस समय की समस्या पता है. हमें इस बात से सावधान रहने की जरूरत है कि किसी तरह की अवांछित घटना या हादसा नहीं हो. नारायणन ने कहा कि इसलिए हम टालने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन हमेशा चिंता बनी रहती है कि यदि इसी तरह चलता रहा तो कोई कहीं अपने धर्य को खो सकता है और कुछ गलत हो सकता है.

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