ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि मैला ढोना ‘सबसे शर्मनाक प्रथाओं’ में से एक है और सरकार इस बुराई से निपटने के लिए एक कानून लाने के लिए प्रतिबद्ध है.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार दिवस के अवसर पर ब्रिटिश काउंसिल में एक फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए जयराम रमेश ने कहा, ‘लगभग तीन लाख परिवार अभी भी भारत में 27 लाख पायखाना साफ करते करते हैं.’
उन्होंने कहा, ‘हम मैला ढोने की प्रथा को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. यह वर्तमान में अस्पृश्यता की सबसे अपमानजनक प्रथा है और इससे जातिगत आधार पर भेदभाव का मुद्दा सामने उभरकर आता है.’