लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार झेलने के बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने अपने खोए जनसमर्थन को फिर से हासिल करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनानी शुरू कर दी है. चुनाव में आरजेडी और जेडीयू को मिले नुकसान के बाद फिर एक बार बिहार में 'मंडल' के दौर की पुरानी राजनीति को दोहराने की कवायद शुरू हो चुकी है. रविवार को लालू ने ट्वीट किया - 'मंडल कमीशन बम है, आरजेडी का हर कार्यकर्ता माचिस है, बस तीली जलाने की देर है'.
मंडल कमीशन बम है, राजद का हर कार्यकर्ता माचिस है, बस तीली जलाने की देर है।
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd)
उन्होंने ट्विटर पर आरएसएस और बीजेपी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आरएसएस वालों ने गांव-टोलों में घूम-घूम कर अफवाहों का बंवडर खड़ा किया. अकलियतों के खिलाफ दलित-पिछड़ों को बरगलाया. मंडलवादी वोट बंट गया.
RSS वालों ने गाँव-टोलों में घूम-घूम कर अफवाहों का बंवडर खड़ा किया। अकलियतों के खिलाफ दलित-पिछड़ों को बरगलाया। मंडलवादी वोट बँट गया|
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd)
उन्होंने कहा कि 18 से 30 वर्ष वाले टेक सेवी (फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब, स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने वालों) को हम नहीं समझा पाये. आरएसएस वालों ने उन्हें उल्लू बनाया. हमें बवंडर एवं पाखंड करना नहीं आता, वो इसके मास्टर है. हमें अफवाहों और पाखंडों की मार्केटिंग करनी नहीं आती. हम यथार्थ की बातें करते हैं.
18-30 वर्ष वाले tech savvy (FB,twitter,U-tube,smart phone use करने वालों) को हम नहीं समझा पाये। RSS वालों उन्हें उल्लू बनाया
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd)
लालू ने दिए बिहार विधानसभा चुनाव जेडीयू के साथ मिलकर लड़ने के संकेत
उन्होंने कहा, हम साथ बैठेंगे और इस तरह के गठबंधन की व्यवहार्यता के बारे में बात करेंगे. मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य में मंडल सामाजिक न्याय के सिद्धांत से जुड़ी पार्टियों को एकजुट होना होगा. इसमें बदलाव की आवश्यकता है और हमें इसके बारे में सोचना है. हमें सबको साथ लेकर चलना होगा.
प्रसाद ने आरजेडी के दो दिवसीय 18वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करने के बाद कहा, मंडल आयोग एक बम है जिसे राजद कार्यकर्ताओं को जलाने को तैयार रहना चाहिए.
...जब मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू करने के बाद राजनीति तेजी से बदली थी बिहार में 90 के दशक में सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए आरक्षण की सिफारिश करने वाले मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने के बाद राजनीति तेजी से बदली थी. मंडल समर्थक ताकतों ने तब से कांग्रेस को राज्य में सत्ता से बेदखल कर रखा है. लालू प्रसाद में नेतृत्व में 1989 में जनता दल सत्ता में आया और जनता दल से अलग होकर बने लालू प्रसाद नीत राजद का राज्य की सत्ता पर 2005 तक कब्जा रहा. उसके बाद एक अन्य ओबीसी नेता नीतीश कुमार सत्ता पर काबिज हुए. शुरुआत में नीतीश लालू के साथ ही थे लेकिन 1994 में उनसे अलग होकर अपनी अलग पार्टी बनाई थी.