मालेगांव धमाकों के सिलसिले में मुंबई एटीएस ने बुधवार को कानपुर से दयानंद पांडे नाम के एक महंत को गिरफ्तार किया है. इंडिया टुडे समूह के अखबार मेल टुडे ने खुलासा किया है कि पांडे पहले भारतीय एयरफोर्स में था. एयरफोर्स में वह नॉन कमीशन आफिसर के पद पर था. दयानंद पांडे ने आठ साल पहले एयरफोर्स की नौकरी से इस्तीफा दे दिया था.
मेल टुडे के मुताबिक 40 वर्षीय दयानंद पांडे उर्फ दयानंद द्विवेदी उर्फ सुधाकर द्विवेदी एयरफोर्स छोड़कर जम्मू चला गया, जहां उसने महंत की उपाधि ली. संघ परिवार के सूत्रों के मुताबिक उसका असली नाम दयानंद द्विवेदी है जबकि पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सुधाकर द्विवेदी है. दयानंद एक रिटायर पुलिसकर्मी का बेटा है.
कानपुर से बुधवार शाम को गिरफ्तार करने के बाद उसे लखनऊ लाया गया, जहां उससे एटीएस पूछताछ कर रही है.
मूल रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले दयानंद बचपन से ही 'भक्ति' की ओर जुड़े हुए थे. पुलिस सूत्रो ने बताया कि मोबाइल फोन की जानकारी खंगालने के बाद पता चला कि दयानंद कानपुर से जम्मू, जम्मू से सूरत और फिर कानपुर होकर आए.
सूत्रों ने बताया कि सन 2000 में वाराणसी में शंकराचार्य बनने के लिए दयानंद ने 15 लाख रुपये घूस दिये थे. इसी सिलसिले में पुलिस ने दयानंद के निजी सचिव और चार्टड एकाउंटेंट वीके कपूर को भी गिरफ्तार किया है.
सूत्रों ने बताया कि दयानंद और ले कर्नल पुरोहित ने मालेगांव विस्फोट के लिए दान में मिले रुपयों का इस्तेमाल किया. स्वामी दयानंद शारदा सर्वोपेठ आश्रम से संबंधित हैं, जिसकी शाखा हरिद्वार और उत्तर प्रदेश में है. अपने शुरुआती दिनों में दयानंद वाराणसी आश्रम के लिए काम करता था लेकिन उसे उसके खराब व्यवहार के कारण वहां से निकाल दिया गया.