कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए महामारी से प्रभावित करीब 40 फीसदी लोगों ने रिश्वत दी. LocalCircles के हाल ही में किए गए एक सर्वे में पाया गया कि पांच में से दो लोगों के परिजन को अस्पताल में प्रवेश, बिस्तर, वेंटिलेटर और दवा का लाभ उठाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी.
LocalCircles ने भारत के 317 जिलों में अपना सर्वे किया, जिसमें 16 हजार से अधिक लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी. सर्वे में पाया गया कि किसी ने भी डॉक्टरों या नर्सों को रिश्वत देने की बात स्वीकार नहीं की, लेकिन उन्होंने अपनी और मरीज की सुविधा के लिए अस्पताल प्रशासन और अन्य कर्मचारियों को रिश्वत जरूर दी.
रिश्वत देने वालों में से 82 फीसदी ने अस्पताल में प्रवेश, बिस्तर, वेंटिलेटर या दवाएं लेने के लिए, 9 फीसदी ने बिल की राशि कम करने के लिए और 9 फीसदी ने आईसीयू में जानकारी प्राप्त करने या किसी से मिलने के लिए पैसे दिये. सर्वे में कहा गया है कि स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचा कोरोना को संभालने में असमर्थ था, जिससे रिश्वतखोरों को पैसे के बदले देखभाल करने वालों की स्थिति का लाभ उठाने का रास्ता मिल गया था.
सर्वे में 7249 उत्तरदाताओं में से 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन के एक कर्मचारी को और अन्य 28 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने एक वार्ड बॉय को रिश्वत दी. वहीं 9 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्होंने स्थानीय राजनेता या नेता, सरकारी कर्मचारी, बिचौलिए को रुपए दिए और अन्य 9 प्रतिशत ने कहा कि उन्होंने फार्मेसी या केमिस्ट को भुगतान किया.
RTPCR टेस्ट के लिए भी अधिक पैसे दिए
सितंबर 2021 में LocalCircles के दूसरे सर्वे में पाया कि RTPCR टेस्ट के लिए 13 प्रतिशत लोगों से अधिक पैसे लिए गए. जबकि 19 प्रतिशत लोगों ने कोविड से संबंधित दवाएं (Tocilizumab, Remdesivir, Fabiflu, etc) ज्यादा दामों में खरीदा. इसके अलावा, दूसरी लहर के दौरान एम्बुलेंस सेवा की आवश्यकता वाले 70 प्रतिशत लोगों से अधिक शुल्क लिया गया और उनमें से आधे ने कीमत से पांच गुना अधिक भुगतान किया.
सर्वे में भाग लेने वालों में से लगभग 68 प्रतिशत पुरुष थे, जबकि 32 प्रतिशत महिलाएं थीं. कुल प्रतिभागियों में से 42 प्रतिशत मेट्रो टियर 1 कस्बों से थे, 32 प्रतिशत टियर 2 कस्बों से थे और 26 प्रतिशत टियर 3 और 4 कस्बों और ग्रामीण इलाकों से थे.