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मुंबई का मास्टरमाइंड आजाद, मोदी की आपत्ति‍ पर फ्रांस का समर्थन

पाकिस्तान में मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमांइड जकीउर रहमान लखवी की रिहाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए फ्रांस ने आज कहा कि यह घटनाक्रम भारत या विश्व के लिए अच्छा नहीं है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फ्रांस के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से भेंट के समय यह मुद्दा उठा.

जकी-उर-रहमान लखवी (फाइल फोटो) जकी-उर-रहमान लखवी (फाइल फोटो)

पाकिस्तान में मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमांइड जकीउर रहमान लखवी की रिहाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए फ्रांस ने आज कहा कि यह घटनाक्रम भारत या विश्व के लिए अच्छा नहीं है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फ्रांस के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल से भेंट के समय यह मुद्दा उठा. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नेशनल एसेंबली के अध्यक्ष क्लाउड बातोलोन कर रहे थे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने बताया, 'फ्रांसिसी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने पाकिस्तान में लखवी की रिहाई को दुर्भायपूर्ण बताया और कहा कि यह भारत या विश्व दोनों के लिए अच्छा नहीं है.' उन्होंने कहा, 'इस मुद्दे पर फ्रांस भारत के साथ एकजुटता व्यक्त करता है.' लश्कर ए तैयबा के आपरेशन कमांडर लखवी को लगभग छह साल की गिरफ्तारी के बाद आज पाकिस्तान की जेल से छोड़ दिया गया.

अकबरूद्दीन ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल से आतंकवाद विरोधी मुद्दे पर सहयोग के बारे में चर्चा के दौरान लखवी का मामला उठा. इस बारे में फ्रांस के रूख पर प्रतिक्रिया करते हुए मोदी ने प्रतिनिधिमंडल से कहा, 'भारत के लिए आपने जो चिंता जताई है और जो वेदना दर्शाई है वह हमारे साझा विचारों को व्यक्त करती है.' प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत और फ्रांस का साझा दृष्टिकोण है.

उन्होंने कहा कि फ्रांस ने जब भी आतंकी हमले का सामना किया पूरा भारत उसके खिलाफ उठ खड़ा हुआ और भारत के खिलाफ ऐसा कुछ होने पर फ्रांस में भी यही भावना रही. लश्करे तैयबा के कमांडर और 2008 के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड जकीउर रहमान लखवी को करीब छह साल हिरासत में गुजारने के बाद आज रिहा कर दिया गया. लाहौर हाई कोर्ट (एलएचसी) द्वारा लखवी की हिरासत निलंबित करने और तत्काल उसकी रिहाई का आदेश देने के बाद लखवी को रावलपिंडी के अदियाला जेल से रिहा कर दिया गया. भारत ने अदालत के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया करते हुए कहा था कि इससे सीमा पार आतंकवाद पर पाकिस्तान द्वारा बार बार दिए गए भरोसे की कीमत खत्म होती है.

55 साल के लखवी की आगवानी के लिए जमात उद दावा के समर्थक जेल के बाहर खड़े थे. अदालत ने एक सुरक्षा अधिनियम के तहत लखवी को हिरासत में लेने के पंजाब सरकार के आदेश को कल निलंबित करते हुए उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया था. इससे पहले आज लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने पीटीआई-भाषा से कहा था कि सरकार के पास उनके मुवक्किल को रिहा करने के अलावा कोई दूसरा कानूनी विकल्प नहीं बचा है.

अब्बासी ने कहा , 'एलएचसी द्वारा मेरे मुवक्किल की हिरासत को खारिज किए जाने के बाद अब सरकार के पास उसे रिहा करने के अलावा कोई अन्य कानूनी विकल्प नहीं बचा है. ना तो सरकार और ना ही अदियाला जेल प्रशासन इस समय अदालत के आदेश का उल्लंघन कर सकते हैं.' लखवी और छह अन्य पर 2008 के मुंबई हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने का मामला दर्ज है. इस हमले में 166 लोग मारे गए थे जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए थे.

लश्करे तैयबा के संस्थापक और जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद के करीबी रिश्तेदार लखवी को दिसंबर 2008 में गिरफ्तार किया गया था.

मुंबई हमले के मुख्य आरोपी जकीउर रहमान लखवी की शुक्रवार को रिहाई के बाद पाकिस्तान के एक प्रमुख समाचार पत्र ने इस खूंखार आतंकवादी के अपराध को साबित करने में विफलता के लिए इस्लामाबाद की खिंचाई की है. लाहौर उच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को लखवी को रिहा करने का आदेश देने के बाद शुक्रवार को अपने संपादकीय में समाचारपत्र नेशन ने कहा, 'लखवी पर मुकदमा चलाने में पाकिस्तान एक बार फिर विफल रहा है. केवल नाकाम ही नहीं, ऐसा लगता है कि इस बार उसने अपनी तरफ से पूरा प्रयास भी नहीं किया.'

अखबार ने कहा है, 'एक तरफ जब देश आतंकवाद से लड़ रहा है, ऐसे में लखवी को दोषी करार देने से आतंकवाद के खिलाफ देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होती.' संपादकीय के मुताबिक, नवंबर 2008 में 166 भारतीय व विदेशी नागरिकों की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराए गए लखवी की रिहाई से पाकिस्तान के नेताओं द्वारा आतंक के खिलाफ दिए गए सारे भाषण खोखले साबित हुए हैं.

अखबार ने कहा है, 'पाखंड इतना स्पष्ट है कि यह जनता की सोच को शर्मिंदा करता है.' लेख के मुताबिक, 'कई साल तक सुनवाई इसलिए टलती रही, क्योंकि सुरक्षा संबंधी चिंता के मद्देनजर न न्यायाधीश और न ही गवाह और न ही आरोपी अदालत में उपस्थित हो पाए.' नेशन ने जेल में लखवी के ठाठ-बाट की ओर इशारा किया. उसे टेलीविजन, इंटरनेट सहित कई सुविधाएं उपलब्ध थीं. वह बिना किसी की अनुमति के मनचाही संख्या में मुलाकातियों से मिल सकता था.

अखबार ने कहा है, 'अगर 132 बच्चों की मौत से भी सरकार सही रास्ते पर नहीं आ सकती, तो यह कहना मुश्किल है कि आगे क्या होगा.'

 

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