scorecardresearch
 

'टेबलटॉप' है कोझिकोड एयरपोर्ट का रनवे, जोखिम भरी होती है लैंडिंग

भौगोलिक रूप से कोझिकोड एयरपोर्ट टेबलटॉप है. इसका मतलब है कि हवाई पट्टी के आस-पास घाटी होती है. टेबलटॉप में रनवे खत्‍म होने के बाद आगे ज्‍यादा जगह नहीं होती है.

Advertisement
X
केरल में विमान हादसा (फोटो- पीटीआई)
केरल में विमान हादसा (फोटो- पीटीआई)

  • केरल में हुआ विमान हादसा
  • प्लेन में 190 लोग थे सवार

केरल में एक बड़ा विमान हादसा सामने आया है. जहां कोझिकोड एयरपोर्ट पर एअर इंडिया का विमान रनवे पर फिसल गया. इसके बाद विमान के दो टुकड़े हो गए. दरअसल, केरल का कोझिकोड एयरपोर्ट भौगोलिक रूप से 'टेबलटॉप' है. जिसे लैडिंग के लिए खतरनाक माना जाता है.

डीजीसीए के मुताबिक एअर इंडिया एक्सप्रेस AXB1344, बोइंग 737 दुबई से कालीकट आ रहा था. भारी बारिश के कारण रनवे पर उतरने के बाद विमान फिसल गया और घाटी में गिर गया. वहीं विमान दो हिस्सों में टूट गया. विमान में 190 लोग सवार थे. इनमें 184 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे. साथ ही यात्रियों में 10 बच्चे भी शामिल थे.

इस हादसे के होने में टेबलटॉप रनवे को भी वजह माना जा रहा है. दरअसल, भौगोलिक रूप से कोझिकोड एयरपोर्ट 'टेबलटॉप' है. इसका मतलब है कि हवाई पट्टी के आस-पास घाटी होती है. टेबलटॉप में रनवे खत्‍म होने के बाद आगे ज्‍यादा जगह नहीं होती है. इसी कारण कोझिकोड में रनवे पर फिसलने के बाद विमान घाटी में जा गिरा. जहां उसके दो टुकड़े हो गए.

Advertisement

ज्यादा जोखिम

हवाई पट्टी की दोनों तरफ या एक तरफ घाटी होने के कारण टेबलटॉप रनवे में जोखिम काफी ज्यादा होता है. लैंडिंग और उड़ान दोनों के दौरान काफी सावधानी बरतनी होती है. जिसके कारण पायलट भी काफी दक्ष होना जरूरी होता है. ज्यादातर टेबलटॉप रनवे पठार या पहाड़ के टॉप पर बने होते हैं. भारत में कर्नाटक के मंगलुरु, केरल के कोझिकोड एयरपोर्ट और मिजोरम में टेबलटॉप रनवे बने हुए हैं.

वहीं पूर्व उड्डयन राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि यहां की हवाई पट्टी करीब 9300 फीट की है. अगर एक शून्य हवाई पट्टी से देखा जाए तो उतरने के लिए मौजूद हवाई पट्टी करीब आठ-सवा आठ हजार फीट की है. ऐसे में बारिश के मौसम में रनवे गिला होता है तो जो ब्रेकिंग की जाती है वो हाईएस्ट ब्रेकिंग की जाती है.

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement