scorecardresearch
 

Opinion: मोदी को घेरने की केजरीवाल की राजनीति

बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलकर अरविंद केजरीवाल क्या साबित करना चाहते हैं. यह कहना मुश्किल है लेकिन उनका इरादा वह कतई नहीं है जो दिख रहा है. वे उससे भी दूर की सोच रहे हैं. अपने छापामार स्टाइल में वह गुजरात के दौरे पर गए और वहां के शासन व्यवस्था में कई तरह की खामियां ढूंढ़ी और सीधे जवाब मांगने जाने लगे मुख्यमंत्री मोदी के पास.

Advertisement
X
अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल

बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलकर अरविंद केजरीवाल क्या साबित करना चाहते हैं. यह कहना मुश्किल है लेकिन उनका इरादा वह कतई नहीं है जो दिख रहा है. वे उससे भी दूर की सोच रहे हैं. अपने छापामार स्टाइल में वह गुजरात के दौरे पर गए और वहां के शासन व्यवस्था में कई तरह की खामियां ढूंढ़ी और सीधे जवाब मांगने जाने लगे मुख्यमंत्री मोदी के पास.

जाहिर है उन्हें इस तरह से अनुमति नहीं मिलती और वह यही चाहते भी थे. अब वे शिकायतों का पिटारा लेकर खड़े हैं. उनका कहना है कि गुजरात में कोई विकास नहीं हुआ है और यह सब महज पब्लिसिटी है. इसके अलावा भी ढेर सारी बातें वे कई दिनों तक बताते रहेंगे.

केजरीवाल ने बहुत सोच समझकर यह कदम उठाया है. उनके पास कांग्रेस का विरोध करने के लिए कुछ बचा नहीं है. इसलिए उन्होंने मोदी और गुजरात पर हमला बोला ताकि उन्हें बड़ी पब्लिसिटी तो मिले ही, उनकी अपनी खामियां छुप जाएं. अपनी डेढ़ महीने की सरकार की असफलता को छुपाने के लिए उनके पास कोई रास्ता नहीं था.

ऐसे में इस तरह से गुजरात की यात्रा करने से उन्हें खूब पब्लिसिटी मिली. यही तो वह चाहते थे. उनकी मंशा साफ है कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा पब्लिसिटी मिले और वे खूब शोर मचा सकें. दिल्ली में उनके कार्यकर्ताओं ने जो उत्पात मचाया, उससे उनकी पार्टी की काफी भद पिटी. अब वे मोदी पर जमकर हमला करके उसकी भरपाई कर रहे हैं.

Advertisement

ऐसा लगता है कि केजरीवाल इतना शोर मचाना चाहते हैं कि बाकी सभी मुद्दे उसके आगे दब जाएं. वह प्रचार युद्ध में सबसे आगे रहना चाहते हैं. इसके लिए वह आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं. लेकिन इस तरह से वह कैसे जनता की नजरों में अपने को बेहतर साबित कर सकेंगे, यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि दूसरे को नीचा दिखाकर कोई भी बहुत दिनों तक आगे बढ़ा नहीं रह सकता है.

यहां पर एक बात और दिखती है. नरेंद्र मोदी के सिपहसलार केजरीवाल के हमलों को ठीक से समझ नहीं पाए. उनका गुजरात में स्वागत करके उन्हें पस्त कर देने की नीति की बजाय उन्होंने उन्हें रोकने की चेष्टा की और वे केजरीवाल के जाल में फंस गए. केजरीवाल को किसी सवाल के जवाब में रुचि नहीं रहती है, अगर ऐसा होता तो वे उन हजारों जवाबों को पढ़ते रहते जो उन्हें भेजे गए.

सवाल पूछकर और उन्हें हवा में उछाल कर या फिर आरोप मढ़कर निकल जाना उनकी फितरत रही है. वह इस प्रयास से प्रतिद्वंद्वी को पस्त कर देना चाहते हैं. यह उनका पुराना तरीका है. वह अब राजनीति के खेल में परिपक्व होते जा रहे हैं और उन्हें पता है कि टीवी कैमरों को कैसे अपनी ओर मोड़ा जा सकता है.

Advertisement

गुजरात का दौरा करके उन्होंने एक बड़ी चाल चली है. अब मोदी और उनके सिपहसलारों को सोचना होगा कि केजरीवाल के चालों की काट क्या हो सकती है क्योंकि यह तय है कि पूरे चुनाव तक वह मोदी को ही निशाना बनाते रहेंगे. आखिर राष्ट्रीय स्तर पर अपने को स्थापित करने के लिए इससे बेहतर मौका उन्हें कब मिलेगा!

Advertisement
Advertisement