बीजेपी का छात्र विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन्स (NRC) की सप्लीमेंट्री लिस्ट के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी में है. ये लिस्ट 31 अगस्त को जारी की गई. इस लिस्ट में 19 लाख से ज्यादा लोगों के नाम शामिल नहीं है. वहीं ABVP के असम प्रदेश सचिव राकेश दास का दावा है कि राज्य कश्मीर की तरह एक इस्लामी राज्य में बदल जाएगा और जो नुकसान होगा उसकी भरपाई नहीं की जा सकेगी.
दास ने कहा, 'असम एक इस्लामिक राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है. मौजूदा NRC ने यहां रह रहे बाहरी लोगों को जश्न का मौका दिया है वहीं बाकी लोग जो यहां के असल नागरिक हैं वो शिकायत कर रहे हैं. ऐसे कई लोग हैं जिनके सभी दस्तावेज पूरे हैं लेकिन उनके नाम लिस्ट में नहीं है. ये कैसे संभव है जबकि एक दशक पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने असम में अवैध आप्रवासियों की संख्या 40 लाख से अधिक बताई थी. अगर इस NRC को स्वीकार कर लिया गया तो ये असम को कश्मीर जैसा इस्लामिक राज्य बनाना होगा.'
सिस्टम और डेटा सुरक्षा पर बोलते हुए दास ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन जिस तरह इस प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, हम उस मुद्दे को उठा रहे हैं. डेटा एंट्री को लेकर बड़ी चूक और समस्याएं रही हैं.'
ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) असम का सबसे बड़ा छात्र संगठन है. साथ ही ये असम समझौते का भी एक अहम पक्ष रहा है. इसकी ओर से NRC की मांग को उठाया जाता रहा. लेकिन हाल में AASU ने ये कहते हुए अपने सुर धीमे कर लिए कि प्रक्रिया में खामियां हैं और अंतिम आंकड़े उम्मीद से मेल नहीं खा रहे.
ABVP ने राज्य में प्रतिद्वन्द्वी AASU पर निशाना साधा है. ABVP राज्य सचिव दास ने कहा, 'हम जानना चाहते हैं कि AASU किसके साथ खड़ा है? उन्होंने हमारी साख पर सवाल उठाया है. अब जब NRC अवैध आप्रवासियों को फायदा पहुंचा रहा है और यहां के मूल नागरिकों को नहीं. ऐसे में वो अपना रुख बदल रहे हैं. कह रहे हैं कि ये सही नहीं है.'
दास ने साफ किया कि जल्दी ही राज्य में बड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे. लोगों को जागरूक किया जाएगा जिससे सुनिश्चित किया जा सके लोग सत्तारूढ़ पार्टी (बीजेपी) से नाराज़ ना हों.
दास ने कहा, 'हमें एक आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है. हम चाहते हैं कि मूल नागरिक अपनी आवाज उठाएं. दरअसल, मोती उर रहमान केस नंबर 526/10 जो 1951 को 'कट ऑफ ईयर' के तौर पर माने जाने की मांग कर रहा है. हम भी इसका समर्थन कर रहे हैं. हम असली तस्वीर और असम के लोगों के लिए इंसाफ चाहते हैं जो दशकों से अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं.'