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मुंबई पर हुए आतंकी हमले में कसाब दोषी करार

मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के मामले में विशेष अदालत ने अजमल आमिर कसाब को दोषी करार दिया है. इसी मामले में कोर्ट ने फहीम अंसारी और सबाउद्दीन को बरी कर दिया है.

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मुंबई पर हुए आतंकी हमलों के मामले में विशेष अदालत ने अजमल आमिर कसाब को दोषी करार दिया है. इसी मामले में कोर्ट ने फहीम अंसारी और सबाउद्दीन को बरी कर दिया है.

अदालत ने कसाब को 83 मामलों में दोषी पाया. सजा का ऐलान कल किया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि इस हमले के पीछे सईद का हाथ है. कोर्ट ने कहा कि हाफिज सईद के खिलाफ काफी सबूत है और कोर्ट ऐसा मानती है कि हमले के पीछे हाफिज सईद ही है.

हमलों के दौरान जीवित पकड़े गये एकमात्र आतंकवादी अजमल कसाब की कोठरी और विशेष अदालत दोनों उच्च सुरक्षा वाले कारागार के भीतर स्थित हैं. पुलिस सूत्रों ने कहा कि दक्षिणी मुंबई में सात रास्ता पर स्थित इस कारागार की ओर जाने वाले साणे गुरुजी मार्ग पर सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर जांच चौकियां स्थापित की गयी हैं. गश्त तेज कर दी गयी है और बालू के बंकर बनाकर पुलिसकर्मी दिन रात चौकसी कर रहे हैं.

इस कारागार के करीब स्थित सड़क पर यातायात को एकतरफा कर दिया गया है और यहां से गुजरने वाले सभी वाहनों के नंबर प्लेटों को पुलिस दर्ज कर रही है.{mospagebreak}
करीब एक वर्ष पहले कसाब के खिलाफ मामले की सुनवाई शुरू हुई थी. तब से उसे किसी भी हमले से बचाने के लिए तैयार एक विशेष बुलेट प्रूफ और बम निरोधक कोठरी में बंद कर रखा गया है. इस कोठरी को एक सुरंग के माध्यम से अदालत से जोड़ा गया है जिसे कोई गोली या बम बेध नहीं सकता.

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कसाब की सुरक्षा में भारत तिब्बत सीमा पुलिस के 200 कर्मियों के एक दल को तैनात किया गया है. जेल के दो भाग हैं एक में विशेष अदालत तथा कसाब की कोठरी है तथा अन्य में 11 बैरक, एक जेल अस्पताल और हाई प्रोफाइल कैदियों के लिए एक अंडाकार कोठरी है.

न्यायाधीश एम एल तहिलयानी की अदालत में 30 गवाहों ने कसाब को उस आदमी के तौर पर पहचाना, जिसने उन पर गोली चलाई थी. उज्ज्वल निकम के नेतृत्व में अभियोजन पक्ष ने जांच के दौरान जब्त 1,015 लेख अदालत के समक्ष दर्ज कराए और अपने मामले के पक्ष में 1,691 दस्तावेज प्रस्तुत किए. अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि हमले में लश्कर ने पाकिस्तान की सुरक्षा सामग्री का भी उपयोग किया.{mospagebreak}

भारतीय कानून के इतिहास में पहली बार एफबीआई के अधिकारियों ने तकनीकी सबूत दिए कि हत्यारे ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम की मदद से पाकिस्तान से आए. वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल के माध्यम से सबूत के तौर पर बताया गया कि हत्यारों ने अपने मोबाइल फोन से पाकिस्तान में बैठे आकाओं से बात की.

अभियोजन ने सीसीटीवी फुटेज से मिले सबूत भी पेश किए, जिनमें आतंकियों को बंदूकें लेकर घूमते और लोगों पर गोलीबारी करते दिखाया गया. ये तस्वीरें सीएसटी रेलवे स्टेशन, टाइम्स ऑफ इंडिया बिल्डिंग, ताज महल होटल और ओबेराय होटल में लगे सीसीटीवी कैमरा की थीं.

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फोटो पत्रकार सेबेस्टियन डीसूजा और श्रीराम वरनेकर द्वारा खींची गईं कसाब की तस्वीरों को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया. हालांकि कसाब ने कहा कि इन तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई है और तस्वीरों में जिसे दिखाया गया है, वह कसाब नहीं है.

कसाब को उच्च सुरक्षा युक्त आर्थर रोड जेल की एक विशेष बुलेट और बम निरोधी सेल में रखा गया. उसे रोज 10 से 12 सुरक्षाकर्मियों के घेरे में जेल परिसर में बनी अदालत ले जाया जाता था.{mospagebreak}

कसाब पर मुकदमा शुरू होने के बाद से ही भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के लगभग 200 जवान 24 घंटे उसकी सुरक्षा करते हैं. कसाब को हमले के पहले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था और उसने पिछले साल फरवरी में मजिस्ट्रेट के सामने अपना गुनाह कबूल कर लिया था.

मुकदमे के दौरान कसाब अपने पहले के बयान से पलट गया और हमले में अपनी भूमिका को कम करते हुए उसने सारा दोष अपने साथी अबू इस्माइल पर डाल दिया. मुकदमे के अंत में उसने अपने पुराने सभी बयानों को खारिज करते हुए स्वयं के निर्दोष होने का दावा किया.

कसाब ने दावा किया कि वह अवयस्क है, लेकिन अदालत ने वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी. 25 फरवरी, 2008 को दायर 11,000 पृष्ठों के आरोपपत्र में उसकी उम्र 21 वर्ष बताई गई.

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कसाब की ओर से तीन वकीलों ने मुकदमा लड़ा. सबसे पहले नियुक्त हुई वकील अंजलि वाघमारे को मुकदमा शुरू होने से पहले ही तकनीकी कारणों से हटा दिया गया. अदालत को पता चला था कि अंजलि मामले के एक और गवाह का अदालत में प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

अंजलि के बाद नियुक्त हुए अब्बास काजमी को अदालत के साथ सहयोग न करने के कारण मुकदमे के बीच में हटा दिया गया. इसके बाद मुकदमे के अंत तक कसाब का प्रतिनिधितव करने वाले केपी पवार ने अपनी याचिका में कहा कि उनका मुवक्किल कसाब निर्दोष है और उसे पुलिस ने हमले के कुछ दिन पहले ही चौपाटी से गिरफ्तार किया था.{mospagebreak}

अभियोजन के मुताबिक कसाब और उसके साथियों को लश्कर प्रमुख हाफिज सईद और लश्कर के ऑपरेशन प्रमुख जकी-उर-रहमान लखवी ने पाकिस्तान के मुरीदके में कमांडो और खुफिया प्रशिक्षण दिया. आरोपपत्र में कहा गया है कि हमलावर कराची से ‘अल-हुसैनी’ नाव में आए, जिसे उन्होंने पोरबंदर के पास लावारिस छोड़ दिया. यहां उन्होंने भारतीय मछलीपालन नौका ‘कुबेर’ का अपहरण किया, जिससे वे मुंबई पहुंचे.

आतंकियों ने कुबेर के नौका चालक अमर सिंह सोलंकी और चार नाविकों की हत्या कर दी. सोलंकी का शव उसके केबिन में मिला, जबकि शेष चारों के शवों को आतंकियों ने समुद्र में फेंक दिया.

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अभियोजकों ने कसाब के डीएनए के कुबेर पर मिले सामान से मेल करती हुई रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत की.

आतंकियों ने कुबेर को मुंबई तट के पास छोड़ दिया, इसके बाद हमलावर पाकिस्तान से अपने साथ लाई डिंगी (रबर की नाव) में तट तक पहुंचे. आतंकी बधवार पार्क के पास उतरे और दो-दो के पांच समूहों में बंट कर अलग-अलग दिशाओं में चले गए. अभियोजन ने इस बात के भी सबूत पेश किए कि डिंगी में लगा होंडा इंजन जापान में बना था और पाकिस्तान को निर्यात किया गया था.{mospagebreak}

आतंकियों ने होटल ट्राइडेंट-ओबेराय, होटल ताज महल, नरीमन हाउस, सीएसटी, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल और मेट्रो सिनेमा जंक्शन पर गोलीबारी की. उन्होंने दो टैक्सियों में भी बम रखे, जिनके फटने से कई लोगों की मौत हो गई.

हमले के दौरान पाकिस्तानी आतंकियों ने होटल ताज, ओबेराय और नरीमन हाउस में सैकड़ों लोगांे को बंधक बनाया. इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्डस और आतंकियों के बीच लगभग 60 घंटे तक संघर्ष चला. हमले में नौ आतंकी मारे गए, जिनकी पहचान अबू इस्माइल, अबू अकाशा, अबू उमर, अब्दुल रहमान बादा, अबू उमेर, अब्दुल रहमान छोटा, फहाद उल्ला, जावेद अबू अली और अबू शोएब के रूप में हुई.

कसाब को पुलिस के साथ मुठभेड़ के बाद गिरगांव चौपाटी पर गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार होने के पहले कसाब और इस्माइल ने सीएसटी, मेट्रो जंक्शन और कामा अस्पताल के बाहर कई लोगों की हत्या कर दी थी.

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इन्हीं दोनों आतंकियों ने एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे, आईपीएस अधिकारी अशोक कामटे और मुठभेड़ विशेषज्ञ विजय सालस्कर की भी हत्या की थी.

मुकदमे के दौरान अदालत ने 27 लापता आरोपियों के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किया, जिनमें सईद और लखवी भी शामिल थे. इंटरपोल को वारंट दिए जाने के बाद भी दोनों गिरफ्तार नहीं हुए हैं. सभी आतंकियों के पास से फर्जी पहचानपत्र भी बरामद हुए, जिन्होंने अपनी पाकिस्तानी पहचान छिपा कर खुद को भारतीय छात्रों के रूप में पेश किया था.

इसके अलावा कुबेर से दैनिक उपयोग की कई वस्तुएं मिलीं, जिन पर ‘मेड इन पाकिस्तान’ लिखा था.

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