न्यायाधीशों द्वारा अपनी संपत्ति की घोषणा किए जाने के खिलाफ होने की धारणा को खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन ने कहा कि उच्च न्यायपालिका के सदस्य ऐसा करने को स्वतंत्र हैं.
पूर्व के वक्तव्य पर कायम
इसके साथ ही बालाकृष्णन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश डी. वी. शैलेंद्र कुमार को 'पब्लिसिटी क्रेजी' बताते हुए उनकी आलोचना की. बालाकृष्णन ने कहा कि न्यायपालिका का अध्यक्ष होने के कारण उन्हें सभी न्यायधीशों की ओर से बोलने का अधिकार है और यह अन्य देशों की न्याय प्रणाली में भी लागू है. बालाकृष्णन ने कहा, ‘‘ लोगों को यह जानने का अधिकार है कि न्यायपालिका में क्या हो रहा है और न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा के बारे में मैंने जो कहा है, उस पर कायम हूं. ’’
आम सहमति बनाना जरूरी
बालाकृष्णन ने कहा, ‘‘ अगर न्यायाधीश अपनी संपत्ति घोषित करना चाहते हैं तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता. मैं उन्हें कैसे रोक सकता हूं. अगर कानून आ जाता है तो हरेक को घोषणा करनी होगी. ’’ उन्होंने कहा कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा संपत्ति की घोषणा के बारे में बात की थी. संपत्ति की घोषणा संबंधी कानून के अभाव में न्यायाधीशों के बीच कोई समझौता नहीं है और इस संदर्भ में आम सहमति तैयार करना होगा.