दिल्ली सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में चार दोषियों की मौत की सजा के आदेश पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद न्यायाधीश ने परंपरा को ध्यान में रखते हुए कलम की निब तोड़ दी.
अदालत सूत्रों ने बताया, ‘महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के न्यायाधीश का कार्यभार संभालने के बाद से अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खन्ना ने पहली मौत की सजा सुनाई.’
न्यायाधीश ने सजा सुनाने में तीन मिनट से भी कम का समय लिया और 20 पन्नों के आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद कलम की निब तोड़ दी और उसके बाद अपने चैंबर में चले गए.
मौत की सजा के आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद कलम की निब तोड़ने की परंपरा भारत में ब्रिटिश शासनकाल के दिनों से ही रही है.