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कश्मीर से जुड़ी याचिका पर तुरंत सुनवाई से SC का इनकार

याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है और अदालत से इस पर एक्शन लेने को कहा है. ये याचिका कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला की तरफ से दायर की गई है.

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जम्मू-कश्मीर के मसले पर होगी सुनवाई
जम्मू-कश्मीर के मसले पर होगी सुनवाई

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को कमजोर किए जाने, राज्य का बंटवारा करने का फैसला जब से भारत सरकार ने किया है तभी से इस पर चर्चा जारी है. इस बीच इस फैसले का विरोध करने वाले भी काफी बड़ी संख्या में हैं. अब ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जहां इस पर आज सुनवाई होनी है. हालांकि, इनमें से एक याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है.

जम्मू-कश्मीर में मीडिया पर लगी पाबंदी को हटाने को लेकर दायर की गई याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है. अदालत का कहना है कि आप रजिस्ट्री के पास जाइए. ये याचिका समाचार पत्र-कश्मीर टाइम्स की अनुराधा बासिन ने अदालत में एक याचिका दायर की थी, जिसमें अपील की गई है कि पत्रकारों पर जो रोक लगाई है, उसे हटाया जाए. ताकि पत्रकार खुले तौर पर कश्मीर के हालातों को बयां कर सकें. इसके अलावा इस याचिका में मोबाइल फोन, इंटरनेट को जल्द शुरू किए जाने की अपील की थी.

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इसके अलावा जो अपील दायर की गई है उसमेें याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है और अदालत से इस पर एक्शन लेने को कहा है. ये याचिका कांग्रेस समर्थक तहसीन पूनावाला की तरफ से दायर की गई है. इसके अलावा भी एक याचिका है, जो सर्वोच्च अदालत में दायर की गई है.

ये मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस एम. आर. शाह और जस्टिस अजय रस्तोगी के सामने उठाया जाएगा.

आपको बता दें कि 5 अगस्त को मोदी सरकार ने जब ये फैसला लिया और जिस तरह दोनों सदनों से ये बिल पास हुआ, उस पर तभी से सवाल खड़े हो रहे हैं. कांग्रेस समेत विपक्ष की कुछ पार्टियों ने इस बिल और तरीके को गैरसंवैधानिक बताया है, साथ ही दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट में ये बिल आदेश नहीं टिकेगा. हालांकि, कुछ संविधान विशेषज्ञों ने इस फैसले को सही भी बताया है.

गौरतलब है कि अभी भी जम्मू-कश्मीर में धारा 144 लागू है, स्कूल-कॉलेज, मोबाइल इंटरनेट, मोबाइल कॉलिंग बंद है. टीवी-केबिल पर भी रोक लगी हुई है. इस बीच कई नेताओं जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, उमर अब्दुल्ला, सज्जाद लोन शामिल हैं उन्हें नज़रबंद किया गया है. इसी को लेकर कई राजनीतिक दल मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं.

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हालांकि, सोमवार को राज्य में ईद काफी शांति से मनाई गई. ईद को देखते हुए प्रशासन ने धारा 144 में छूट दी थी. वहीं अगर जम्मू क्षेत्र की बात करें तो वहां से धारा 144 हटा दी गई है, मोबाइल सेवा भी चालू कर दी गई है.

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