मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उपजे तनाव का असर इन दिनों अटारी-वाघा सीमा पर दिखने लगा है. हर शाम सीमा पर दोनों ओर के सैनिक अपने- अपने देश का ध्वज उतारने की रस्म निभाते रहे हैं लेकिन इन दिनों युद्ध से जुड़ी बयानबाजियों के बीच इस रस्म के दौरान दोनों ओर के जवानों के हाव-भाव काफी आक्रामक प्रतीत हो रहे हैं. यह युद्ध क्षेत्र भले ही नही हो लेकिन सीमा के दोनों ओर लगाए जाने वाले राष्ट्रभक्ति के नारे युद्ध-घोष के समान सुनाई दे रहे हैं.
अमृतसर से 30 किलोमीटर दूर स्थित अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दोनों देशों द्वारा रोजाना आयोजित होने वाले 'रिट्रीट' समारोह में जवानों के भाव-भंगिमाओं पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर साफ देखा जा सकता है. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों का कहना है कि आक्रमकता का प्रदर्शन रोजमर्रा की दिनवचर्या है लेकिन उन्होंने माना है कि मुंबई हमले के बाद इसमें कुछ वृद्धि हुई है.
बीएसएफ के अधिकारियों ने बताया कि तनाव के माहौल में भी बीएसएफ और पाकिस्तान रेंजर्स के अधिकारियों के बीच बातचीत होती है और शाम को पारंपरिक रस्म भी सामान्य ढंग से जारी है. इसके बावजूद भारतीय सीमा की ओर से भारत माता की जय हिंदुस्तान जिंदाबाद और पाकिस्तान सीमा की ओर से पाकिस्तान जिंदाबाद तथा जान जान पाकिस्तान के नारे सुनाई पड़ रहे हैं. रोज शाम को सीमा पर पहुंचने वाले भारतीय दर्शकों की संख्या पाकिस्तानी दर्शकों से तीन से पांच गुना अधिक होती है. लाउडस्पीकर पर देशभक्ति के गानों का बजाया जाना माहौल को और अधिक उन्मादपूर्ण बनाता है.