पशुपति नाथ मंदिर में फिर से भारतीय पुजारियों ने पूजा शुरू कर दी है. नेपाल की माओवादी सरकार ने पहले भारतीय पुजारियों को हटाकर नेपाली पुजारियों को पूजा की जिम्मेदारी सौंप दी थी, लेकिन सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने के खिलाफ जब खुद नेपाली समुदाय उठ खड़ा हुआ तो सरकार को झुकना पड़ा.
सरकार ने बुधवार को कहा था कि मंदिर से भारतीय पुरोहित नहीं हटाए जाएंगे. प्रधानमंत्री प्रचंड ने संसद के विशेष सत्र में यह घोषणा की. प्रचंड ने बताया था कि पशुपति एरिया डेवलेपमेंट ट्रस्ट में भारतीय पुरोहितों की जगह रखे गए दो नेपाली पुरोहितों की नियुक्ति रद कर दी गई है.
गौरतलब है कि करीब 300 साल पुरानी परंपरा को दरकिनार कर इस मंदिर से भारतीय पुजारी हटाए गए थे. यहां के मुख्य पुजारी महाबलेश्वर भट्ट और मंदिर में उनके दो और सहयोगी पी. रामचंद्र और कृष्ण योग भट्ट से इस्तीफा ले लिया गया था. उनकी जगह दो नए नेपाली पंडित नियुक्त किए गए थे.
सन 1747 से अबतक, इस मंदिर में दक्षिण भारतीय पंडित ही पूजा कराते आ रहे थे. नेपाल के राजा मानते थे कि दक्षिण भारतीय पंडितों की हिंदू धर्म के रिति रिवाज़ों पर अच्छी पकड़ होती है.
इसके अलावा मान्यता थी कि नेपाल में किसी राजा की मौत के बाद, शोक मानाने के दौरान, कोई भी नेपाली पूजा नहीं कर सकता. इन्हीं वजहों से इस मंदिर में पूजा का भार हमेशा दक्षिण भारतीय भट्ट ब्राह्मणों को ही सौंपा गया.