बिहार विधानसभा चुनाव में मुकाबला इस बार दो नारों के बीच होने जा रहा है. एक है, 'फिर एक बार नीतीश सरकार' और दूसरा, 'अबकी बार भाजपा सरकार'. दिलचस्प बात ये है कि दोनों ही स्लोगन 'अबकी बार मोदी सरकार' से प्रेरित नजर आते हैं, जिसके नाम 2014 के चुनाव में कामयाबी की कहानी लिखी जा चुकी है. जहां तक चेहरों की बात है तो अभी तक नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ही आमने-सामने नजर आ रहे हैं.
बीजेपी, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बिहार विधानसभा चुनाव पिछले साल के लोक सभा चुनाव की तरह अहम हो गए हैं. यही वजह है बीजेपी कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहती.
10 लाख को न्योता
प्रधानमंत्री मोदी 25 जुलाई को मुजफ्फरपुर में रैली करने जा रहे हैं. विधान परिषद चुनाव में एनडीए को मिली कामयाबी के बाद हो रही मोदी की इस रैली से बीजेपी को काफी उम्मीदें हैं. खास बात ये है कि रैली में शामिल होने के लिए बीजेपी 10 लाख लोगों को व्यक्तिगत तौर पर न्योता भेज रही है, ताकि लोगों के साथ भावनात्मक रिश्ता कायम किया जा सके.
रथयात्रा तो ब्रह्मास्त्र है
रथयात्रा तो बीजेपी का ब्रह्मास्त्र रहा है. अक्टूबर 1990 में लालकृष्ण आडवाणी का रथ तब के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने समस्तीपुर में रोक दिया था. यही रथयात्रा आगे चलकर बीजेपी के दिल्ली पहुंचने का आधार बनी. बाद में बीजेपी नीतीश कुमार के साथ रथ पर सवार होकर पटना भी पहुंची, लेकिन मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होते ही दोनों अलग अलग रथ पर सवार हो गए.
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