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शिक्षा के ढांचे को बदलने की तैयारी में सरकार, टीचर्स को मिलने वाली शिक्षा में भी होगा बदलाव

मानव संसाधन मंत्रालय ने शिक्षा के मूलभूत ढांचे में बदलाव लाने की पूरी तैयारी कर ली है. इसमें बच्चों की शिक्षा पद्धति से लेकर टीचर्स को मिलने वाली शिक्षा में भी बदलाव किया जाएगा.

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HRD मिनिस्टर स्मृति ईरानी
HRD मिनिस्टर स्मृति ईरानी

बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने के साथ-साथ उन्हें देश की संस्कृति के बारे में जानकारी देने के लिए शिक्षा के मूल स्तर को बदलने की तैयारी जोर-शोर से चल रही है. कोई बड़ी बात नहीं है जब आने वाले समय में बच्चे फीजिक्स की किताब खोले तो पहले पेज पर उन्हें देश के उन महान लोगों के पढ़ने को मिले जिन्होंने फीजिक्स के क्षेत्र में अपना योगदान देकर विश्वभर में नाम कमाया.

मानव संसाधन मंत्रालय ने शिक्षा के मूलभूत ढांचे में बदलाव लाने की पूरी तैयारी कर ली है. इसमें बच्चों की शिक्षा पद्धति से लेकर टीचर्स को मिलने वाली शिक्षा में भी बदलाव किया जाएगा. इस काम को अंजाम देने के लिए एक महीने के अंदर राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन किया जाएगा.

इसके लिए बाकायदा देश भर से शिक्षा से जुड़ी तमाम संस्थाओं से सुझाव के साथ-साथ बुद्धिजीवियों के नाम मांगे जा रहे हैं. शिक्षा समिति न्यास के निदेशक दीनानाथ बत्रा ने कहा, 'आयोग का गठन एक महीने के भीतर हो जाएगा. हमसे भी सुझाव मांगे गए है.'

शिक्षा को नया चोला पहनाने के लिए पहले भी कई आयोग का गठन किया गया था लेकिन कुछ खास हो नहीं पाया. वर्ष 1986 में गठित कोठारी आयोग ने तो बाकायदा कह दिया था कि हमने सिफारिशें काफी अच्छी दी थी, लेकिन उसे लागू करवाने में हम कामयाब नहीं हो पाए. इसके अलावा भी शिक्षा में सुधार के लिए कई आयोग बन चुके हैं.

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शिक्षा में सुधार के लिए सबसे पहले राधा कृष्ण आयोग का गठन हुआ था. उसके बाद 1986 में कोठारी आयोग बना, और फिर मुदलियार आयोग. राजीव गांधी के शासन में शिक्षा के आधुनिकीरण के लिए न्यू एजूकेशन पॉलिसी बनाई गई.

उम्मीदों के लहर पर सवार होकर पूर्ण बहुमत पाने वाली मोदी सरकार शिक्षा के मूलभूत ढांचे में बदलाव के लिए राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के गठन की तैयारी में है. लेकिन इसको लेकर कई लोगों के मन में संदेह है कि इसके माध्यम से शिक्षा का भगवाकरण तो नहीं किया जाएगा.

वही, आयोग से जुड़ने वाले बुद्धिजीवियों का कहना है कि बच्चों को उनके देश के बारे में ज्यादा जानकारी देना, उन्हें पर्यावरण के बारे में जागरूक करना, सेहत के बारे में बताना भगवाकरण है तो कोई कुछ भी बोल सकता है. फिलहाल ये तय है कि मंत्रालय शिक्षा के ढांचे में बदलाव के लिए कमर कस चुका है.

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