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मेमन की जमानत बढ़ाने से हाईकोर्ट का इनकार

उच्चतम न्यायालय ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों के दोषी यूसुफ अब्दुल रजाक मेमन को चिकित्सकीय आधार पर दी गयी अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इनकार कर दिया. मेमन को टाडा अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

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उच्चतम न्यायालय ने 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम विस्फोटों के दोषी यूसुफ अब्दुल रजाक मेमन को चिकित्सकीय आधार पर दी गयी अंतरिम जमानत को बढ़ाने से इनकार कर दिया. मेमन को टाडा अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

न्यायमूर्ति पी. सताशिवम और न्यायमूर्ति बीएस चौहान की पीठ ने कहा कि मेमन को उम्रकैद की सजा काटने के लिहाज से जेल में वापस जाना होगा क्योंकि शीर्ष न्यायालय द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने रिपोर्ट दी है कि एक निजी अस्पताल में शिजोफ्रेनिया का उपचार कर रहे मेमन को छुट्टी दी जा सकती है.

शीर्ष न्यायालय ने वरिष्ठ वकील यू.यू. ललित की इस दलील को खारिज कर दिया कि दोषी को उपचार कराते रहने की जरूरत है क्योंकि उसकी हालत में ज्यादा सुधार नहीं है और वह हाइपरटेंशन, मधुमेह तथा अन्य समस्याओं से जूझ रहा है.

हालांकि सालिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम तथा वकील सत्यकाम ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट है कि 17 महीने के उपचार के बाद मेमन की हालत स्थिर है और उसे छुट्टी दी जा सकती है.

इस तर्क से सहमति जताते हुए शीर्ष न्यायालय ने कहा कि मेमन उम्रकैद का सजायाफ्ता है तथा आम आदमी नहीं है और उसका जेल वापस जाना जरूरी है. हालांकि पीठ ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो उसे उपचार के लिए अस्पताल भेजा जा सकता है.

शीर्ष न्यायालय ने 29 फरवरी 2008 को मेमन को चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम जमानत प्रदान की थी.

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