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मोदी बनाम अटल की BJP: अरुणाचल के पूर्व CM गेगांग अपांग ने पार्टी छोड़ी

Former Arunachal Pradesh chief minister Gegong Apang resigned from primary membership of BJP अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी नेतृत्व के नाराज होकर यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि अब भारतीय जनता पार्टी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों से भटक गई है.

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Gegong Apang and Union Home minister Rajnath Singh (Courtecy- India Today)
Gegong Apang and Union Home minister Rajnath Singh (Courtecy- India Today)

लोकसभा चुनाव से पहले अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता गेगोंग अपांग ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. मंगलवार को उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चलने का आरोप लगाया. गेगोंग अपांग ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेजे अपने इस्तीफे में कहा, 'मैं यह देखकर निराश हूं कि भारतीय जनता पार्टी अब अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धातों पर नहीं चल रही.'

उन्होंने कहा कि बीजेपी अब सत्ता हासिल करने का मंच बन गई है. यह एक नेता की मुट्ठी में है, जो विकेंद्रीकरण या लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया से नफरत करता है और उन मूल्यों को नहीं मानता, जिनके लिए पार्टी की स्थापना हुई थी. अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री अपांग ने कहा कि बीजेपी को अरुणाचल प्रदेश में साल 2014 में जनादेश नहीं मिला था, लेकिन बीजेपी नेतृत्व ने खरीद-फरोख्त और हर गंदा तिकड़म करके कालिखो पुल को अरुणाचल का मुख्यमंत्री बनवा दिया.

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उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बावजूद बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश में सरकार बनाई. अपांग ने दावा किया कि कालिखो पुल की आत्महत्या की न तो कोई उचित जांच कराई गई और न ही बीजेपी नेतृत्व ने पूर्वोत्तर में कई अन्य बीजेपी सरकारों के गठन के दौरान नैतिकता का कोई ख्याल ही रखा. उन्होंने कहा कि 10-11 नवंबर को पासीघाट में हुई राज्यस्तरीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान बीजेपी महासचिव राम माधव ने कई सदस्यों और पदाधिकारियों को अपने विचार तक नहीं रखने दिए.

समाचार एजेंसी आईएएनएस ने अपांग के हवाले से कहा, 'चुनाव से पहले पेमा खांडू को अरुणाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय न तो उस नियम के अनुरूप है और न उस परंपरा के, जिसका बीजेपी जैसी काडर वाली पार्टी अनुसरण करती है.'  आपको बता दें कि साल 2014 में अरुणाचल में हुए विधानसभा चुनाव में नबाम टुकी के नेतृत्व में कांग्रेस ने भारी बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के एक साल बाद 47 में से 21 कांग्रेस विधायकों ने टुकी के खिलाफ बगावत कर दी. इसके चलते राज्यपाल ने नबाम टुकी सरकार को बर्खास्त कर दिया और सूबे में राष्ट्रपति शासन लग गया.

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अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू होने के एक महीने के भीतर राज्यपाल ने कांग्रेस के बागी गुट के नेता कलिखो पुल को 19 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी. कलिखो पुल को बीजेपी के 11 विधायकों का भी समर्थन मिला. इसको कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. शीर्ष कोर्ट ने 13 जुलाई को राज्यपाल के फैसले को असंवैधानिक करार दिया और नबाम टुकी के नेतृत्व वाली सरकार को बहाल कर दिया था. इसके बाद 16 जुलाई को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नबाम टुकी के स्थान पर पेमा खांडू को विधायक दल का नेता चुना गया. पेमा खांडू को 44 विधायकों का समर्थन मिला और वो 17 जुलाई, 2016 को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए.

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