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मीट कारोबारी मोईन कुरैशी ने CBI अफसरों को कैसे 'फांसा'- जानें INSIDE STORY

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कुरैशी के खिलाफ सोमवार को दाखिल चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि ब्लैकबेरी मैंसेजर के जरिए इस बात का पता चला है कि मोईन हाई प्रोफाइल लोगों के साथ पैसे का लेन-देन करता था, ताकि नौकरशाहों के जरिए अपना हित साधा जा सके.

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मोईन कुरैशी (फाइल) मोईन कुरैशी (फाइल)

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की चार्जशीट से अरबपति मीट कारोबारी मोईन अख्तर कुरैशी के बारे में नया खुलासा हुआ है. कुरैशी हवाला ट्रांजैक्शन के जरिए सीबीआई और सरकार के प्रमुख अधिकारियों को लुभाने के लिए बड़ी राशि खर्च करता था, इसके लिए वह महंगे फैशन स्टोर्स की रसीद और भारत या विदेश स्थित लक्जरी होटलों में उनके रहने की व्यवस्था करता था. राजनीतिक रसूख वाला यह मीट कारोबारी साल 2011 में ईडी के रडार पर आया, जब टैक्स चोरी के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उसकी जांच शुरू की थी.

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत कुरैशी के खिलाफ सोमवार को दाखिल चार्जशीट में प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि ब्लैकबेरी मैंसेजर के जरिए इस बात का पता चला है कि मोईन हाई प्रोफाइल लोगों के साथ पैसे का लेन-देन करता था, ताकि नौकरशाहों के जरिए अपना हित साधा जा सके.

ईडी के मुताबिक बीबीएम मैसेज में 11.09 करोड़ रुपये के लेन देन का जिक्र है. कुरैशी हवाला डीलिंग के मामलों को विदेशी जगहों पर अंजाम देता था, जहां वह सरकारी अधिकारियों को भुगतान करता था. इन देशों में यूएई, यूके, यूएस, फ्रांस और इटली शामिल हैं.

कुरैशी की एक कर्मचारी दीपाली यादव ने अपने स्टेटमेंट कहा है कि मोईन की पत्नी नसरीन कुरैशी ने उसे निर्देश दिया था कि खर्च के भुगतान के लिए उसे विदेश स्थित महंगे फैशन स्टोर्स जैसे अरमानी, डियोर, शनैल और पेरिस स्थित फोर सीजंस और लंदन स्थित सेंट मार्क होटल से ईमेल मिलेंगे.

दीपाली इन ईमेल्स को हवाला ऑपरेटर परवेज अली का फॉरवर्ड कर देती थी, जो इसका ऑनलाइन भुगतान करता था और बाद में दुबई, लंदन और अमेरिका में बैठे अपने गुर्गों को इस बारे में निर्देश जारी करता था कि वे उक्त जगह या बैंक अकाउंट में निश्चित रकम जमा करा दें.

बीबीएम संदेशों से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि मोईन कुरैशी अन्य लोगों को राहत दिलाने के लिए जांच एजेंसी के साथ डील करता था. इस तरह वह दूसरे अन्य लोगों से भी पैसे ऐंठता था. चार्जशीट के मुताबिक मोईन अक्सर नौकरशाहों और नेताओं के नाम पर दूसरे लोगों से पैसे मांगता था. ये नौकरशाह या नेता या तो खुद पैसे लेते या फिर अपने करीबी लोगों को दिलवाते.

प्रवर्तन निदेशालय अभी दो चश्मदीदों, सतीश सना और प्रदीप कोनेरू पर भरोसा कर रहा है. इन दोनों का दावा है कि सीबीआई से राहत दिलवाने के नाम पर मोईन ने उनसे करोड़ों रुपये लिए हैं.

चार्जशीट कहती है कि कुरैशी के कर्मचारियों आदित्य शर्मा और विनीत वत्स ने अपने बयान में बताया कि कुरैशी नियमित तौर पर महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर बैठे सरकारी अधिकारियों को महंगे गिफ्ट भेजता था. सना ने अपने बयान में कहा कि कुरैशी ने उससे और उसके दोस्तों से दो करोड़ रुपये उनके एक सहयोगी सुकेश गुप्ता की बेल सुनिश्चित कराने के लिए थे.

सुकेश गुप्ता एक केस में सीबीआई द्वारा पकड़े गए थे. सना ने ईडी को बताया कि कुरैशी ने आश्वासन दिया था कि उसकी रंजीत सिन्हा के साथ बात हो गई है और मामला जल्द ही हल हो जाएगा. कुरैशी ने सना को भरोसा दिया था कि सुकेश को बेल मिल जाएगी और सिन्हा ने अपने आदमियों को निर्देश दिया है कि वे बेल का विरोध न करें.

सना ने कहा कि कुरैशी उसे लेकर रंजीत सिन्हा के घर भी गया था. कुरैशी खुद सिन्हा के घर के अंदर चला गया और सना कार में इंतजार करता रहा. कुरैशी जब वापस आया, तो उसने कहा कि काम हो गया है. हालांकि बेल खारिज हो गई, जबकि कुरैशी बार-बार इसके लिए जोर लगाता रहा.

एक और चश्मदीद प्रदीप कोनेरू ने दावा किया है कि उसने मोईन को 5.57 करोड़ दिए हैं ताकि वह तत्कालीन सीबीआई डायरेक्टर एपी सिंह को लुभा सके. उसने दावा किया है कि इस पैसे को भारत और विदेश में सिंह के ऐशोआराम पर खर्च किया गया, जिसमें होटल में रहने का बिल और शॉपिंग का खर्चा शामिल है.

इसके साथ ही मोईन की बेटी सिल्विया कुरैशी सीबीआई का वार्षिक समारोह आयोजित करती थी, जिसके खर्चे के लिए करोड़ों रुपये उगाहे जाते थे. ईडी का कहना है कि हवाला के जरिए कुरैशी फैमिली की खातिर एक बहुत बड़ी राशि परवेज अली को ट्रांसफर की गई, जो बाद में दुबई, पेरिस, लंदन, अमेरिका और हांगकांग ट्रांसफर कर दी गई.

ईडी ने इस बात का भी खुलासा किया है कि 2010 में नसरीन को दिल्ली एयरपोर्ट पर महंगे सामानों की तस्करी करते हुए पकड़ा गया था, जबकि 2013 में मोईन की बेटी पर्निया को सामानों की तस्करी करते हुए इंटरसेप्ट किया गया था. इस मामले में जांच जारी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी सरकारी अधिकारी से इसका कोई संबंध तो नहीं है.

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