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आतंकवाद फैलाने वाले देशों को नाम लेकर शर्मिंदा किया जाए: एस. जयशंकर

विदेश सचिव एस. जयशंकर ने कहा कि कुछ देशों का यह मानना है कि बाहर आतंकवादी समूहों का समर्थन करके वे घरेलू स्तर पर शांति कायम पा सकते हैं जो कि उन देशों का ‘भ्रम’ है.

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आतंकवाद से निपटने के लिए भारत ने बुधवार को एक बार फिर मुहिम तेज करने की अपील की है. भारत ने बुधवार को कहा कि का बकायदा नाम लेकर उन्हें शर्मिन्दा किया जाए और इस बुराई से मुकाबले के लिए एकजुट प्रयास किए जाने चाहिए.

विदेश सचिव एस. जयशंकर ने जयपुर में एक सुरक्षा सम्मेलन में पाकिस्तान का परोक्ष जिक्र करते हुए यह भी कहा कि कुछ देशों का यह मानना है कि बाहर का समर्थन करके वे घरेलू स्तर पर शांति कायम पा सकते हैं जो कि उन देशों का ‘भ्रम’ है. उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया. उन्होंने यह भी कहा कि पिछले महीने पठानकोट में वायुसेना अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले की जांच के संबंध में भारत, पाकिस्तान के साथ संपर्क में बना रहेगा.

'आतंकवाद के खिलाफ एकजुट संदेश देने की जरूरत'
जयशंकर ने ‘आतंकवाद से मुकाबला सम्मेलन 2016’ में कहा, ‘आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों का बकायदा नाम लेकर उन्हें शर्मिंदा किया जाना चाहिए.’ उन्होंने आतंकवाद से मुकाबले के लिए बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित करने की अपील की और साथ ही कहा कि आतंकवाद के तथाकथित पीड़ित तक अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद से लड़ने में सहयोग नहीं करते. जयशंकर ने कहा कि सरकारों को करने के लिए एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए एकजुट संदेश देना चाहिए.

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उन्होंने कहा, ‘पठानकोट हमला होने के बाद से हम पाकिस्तान के संपर्क में हैं . हम अपने स्तर पर तथा एनएसए स्तर पर संपर्क में हैं क्योंकि केवल संपर्क में रहकर ही हम उम्मीद कर सकते हैं कि वे हमारी ओर से दी गई सूचना पर प्रगति करेंगे.’

'भारत की चिंताओं पर अनुकूल प्रतिक्रिया'
देश के पूर्वी भागों में आतंकवाद के मसले पर विदेश सचिव ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के मसले पर भारत सरकार की म्यांमार से बातचीत हुई है और भारत की चिंताओं पर अनुकूल प्रतिक्रिया मिली है. इसी संबंध में किए गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, ‘म्यांमार के साथ हमारी कुछ समस्याएं हैं और हमारी उनसे कुछ बातचीत भी हुई है. पिछले कुछ महीनों में कुछ घटनाएं हुई हैं और पूर्व में सीमा पार से आतंकवादी हमला होने की आशंकाएं कम होंगी.’

उन्होंने कहा, ‘ हमारा इतिहास एक अच्छा उदाहरण है और आतंकवाद से मुकाबले की एक शानदार कहानी है. हमने व्यावहारिक, विधिक, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक रूप से काम करने की जरूरत है . यह (आतंकवाद) एक बड़ी चुनौती है.’

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