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RSS के न्यौते पर प्रणब ने तोड़ी चुप्पी, कहा- जो कहूंगा, नागपुर में कहूंगा

पूर्व राष्ट्रपति ने बताया कि इस दौरान उनके पास कई लोगों के फोन आए, चिट्ठियां आईं, लेकिन उन्होंने किसी को जवाब नहीं दिया. अब वह सीधे नागपुर में ही अपनी बात रखेंगे. प्रणब ने एक बांग्ला दैनिक से बातचीत में यह बात कही है.

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प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो) प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर में होने वाले संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह के लिए मुख्य अतिथि के तौर पर मिले निमंत्रण पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को पहली बार प्रतिक्रिया जाहिर की. उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी बोलना है, वह उसे नागपुर में बोलेंगे.

पूर्व राष्ट्रपति ने बताया कि इस दौरान उनके पास कई लोगों के फोन आए, चिट्ठियां आईं, लेकिन उन्होंने किसी को जवाब नहीं दिया. अब वह सीधे नागपुर में ही अपनी बात रखेंगे. प्रणब ने एक बांग्ला दैनिक से बातचीत में यह बात कही है.

कांग्रेस में विरोध

गौरतलब है कि प्रणब मुखर्जी के आरएसएस के कार्यक्रम में जाने के फैसले के बाद कांग्रेस के एक धड़े में विरोध के स्वर उठने लगे. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सी. के. जाफर ने मुखर्जी को एक लेटर लिखकर उनसे यह दौरा रद्द करने की मांग की थी. दुख और निराशा जाहिर करते हुए जाफर ने कहा, 'मैं यह समझने में असमर्थ हूं कि इसके लिए क्या मजबूरी है.'

वहीं पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का कहना था, 'वह (प्रणब मुखर्जी) आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार कर चुके हैं. ऐसे में इसकी चर्चा करनी ही बेकार है कि उन्हें उस कार्यक्रम में जाना चाहिए या नहीं. यदि मुझे निमंत्रण मिलता तो मैं उसे अस्वीकार कर देता. मगर अब जब वह निमंत्रण स्वीकार कर चुके हैं तो उन्हें वहां जाना चाहिए और बताना चाहिए कि उनकी (संघ) विचारधारा में क्या गड़बड़ी है.

प्रणब की प्रतिक्रिया

बहरहाल, आरएसएस के कार्यक्रम में जाने को लेकर उठे विवाद के बाद प्रणब ने पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'मुझे जो कुछ कहना है, नागपुर में कहूंगा. इस मसले को लेकर मुझे कई फोन आए और कई लोगों के पत्र भी मिले, लेकिन अभी तक मैंने किसी का जवाब नहीं दिया है.'

बता दें कि कांग्रेस के कई नेता मान रहे हैं कि प्रणब मुखर्जी का आरएसएस के कार्यक्रम में जाना कांग्रेस और 'सेकुलर' खेमे के लिए नुकसानदेह है. इन नेताओं का कहना है कि 'सेकुलर' पार्टी के नेता का आरएसएस के मुख्यालय जाने का मतलब उसे एक तरह से मान्यता प्रदान करना है, जो कि अभी तक कांग्रेस के लिए 'अस्पृश्य' रही है और राहुल गांधी हर भाषण में जिस पर हमला करते रहे हैं.

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