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बर्निंग ट्रेन बनने से बची कामाख्या एक्सप्रेस, जानिए कैसे टला बड़ा हादसा

ड्राइवर ने ट्रेन से जनरेटर रूम और पार्सल कोच को अलग कर दिया, जिससे दूसरे डिब्बों तक आग नहीं पहुंच पाई. इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन दिल्ली-हावड़ा रूट जरूर प्रभावित हुआ. जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, चारों ओर अफरा-तफरी मच गई.

आग की चपेट में कामाख्या एक्सप्रेस। (Photo-ANI) आग की चपेट में कामाख्या एक्सप्रेस। (Photo-ANI)

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के कैलहट में कामाख्या एक्सप्रेस के इंजन और जनरेटर रूम में गुरुवार को अचानक आग लग गई. लेकिन ड्राइवर की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया. ड्राइवर ने ट्रेन से जनरेटर रूम और पार्सल कोच को अलग कर दिया, जिससे दूसरे डिब्बों तक आग नहीं पहुंच पाई. इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन दिल्ली-हावड़ा रूट जरूर प्रभावित हुआ. हादसे का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है. जैसे ही आग लगने की सूचना मिली, चारों ओर अफरा-तफरी मच गई.

लोग अपना सामान लेकर ट्रेन से उतरने लगे. ड्राइवर ने इसके बारे में कंट्रोल रूम को बताया. फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया है. यह हादसा सुबह करीब 11 बजकर 50 मिट पर हुआ. मौके पर राहत न पहुंचने से जनरेटर कोच जलकर पूरी तरह खाक हो गया है. सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेन को कैलहट स्टेशन से पहले ही रोक दिया गया था. जैसे ही सूचना रेलवे के आला अधिकारियों के पास पहुंची, उनके हाथ-पांव फूल गए. पहले उन्हें लगा कि पूरी ट्रेन में आग लगी है. लेकिन सिर्फ जनरेटर रूम में आग की खबर सुनकर उनकी सांस में सांस आई.

पिछले महीने दिल्ली-हावड़ा रूट पर ही पूर्वा एक्सप्रेस बेपटरी हो गई थी. इस हादसे में 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. लेकिन एचएचबी कोच होने के कारण किसी की जान नहीं गई. हादसा इतना खतरनाक था कि पेंट्रीकार समेत 10 कोच पटरी से उतर गए. करीब 5 कोच पटरी से 20 से 25 फुट दूर जा गिरे. गौरतलब है कि पिछले साल दशहरे के दिन अमृतसर के जोड़ा फाटक के पास एक तेज रफ्तार ट्रेन ट्रैक पर खड़े लोगों को रौंदती हुई चली गई थी. ये लोग ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे. इस हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

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