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पिछले साल के मुकाबले रेलवे टिकट बुकिंग में आई कमी, भारतीय रेलवे परेशान

ट्रेनों में भले ही यात्रियों की भीड़ हो, लेकिन पिछले छह महीनों में टिकट बुकिंग दर में कमी आई है जिसके कारण, पहले से ही अर्थ संकट से जूझ रही रेलवे चिंतित है. अगर गैर उपनगरीय क्षेत्र की यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या के हिसाब से देखा जाए, तो इस बार अप्रैल-सितंबर में इन यात्रियों की संख्या 198.23 करोड़ रही, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह संख्या 205.80 करोड़ थी.

रेलवे टिकट काउंटर रेलवे टिकट काउंटर

ट्रेनों में भले ही यात्रियों की भीड़ हो, लेकिन पिछले छह महीनों में टिकट बुकिंग दर में कमी आई है जिसके कारण, पहले से ही अर्थ संकट से जूझ रही रेलवे चिंतित है. अगर गैर उपनगरीय क्षेत्र की यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या के हिसाब से देखा जाए, तो इस बार अप्रैल-सितंबर में इन यात्रियों की संख्या 198.23 करोड़ रही, जबकि पिछले साल इसी दौरान यह संख्या 205.80 करोड़ थी.

गैर उपनगरीय क्षेत्र में मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों में आरक्षित और गैर आरक्षित श्रेणी शामिल हैं. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार छह महीने में टिकट बुकिंग में पिछले साल के मुकाबले 3.68 प्रतिशत की कमी देखी गई. रेलवे ने यात्री किराए, आरक्षण शुल्क और सुपर फास्ट अधिभार (सरचार्ज) में वृद्धि की, लेकिन इसके बावजूद रेलवे की आमदनी में बढोत्तरी उम्मीद के अनुरूप नहीं है.

अप्रैल से सितंबर तक की अवधि में रेलवे ने यात्रियों से 18,099.33 करोड़ रुपये की कमाई की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह कमाई 15,582.42 करोड़ रुपये थी. यानी इस साल इस अवधि में आमदनी में पिछले साल के मुकाबले केवल 16.16 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि रेलवे ने 20 प्रतिशत से अधिक की कमाई का अनुमान लगाया था.

राजस्व में गिरावट के लिए लोगों की बिना टिकट यात्रा को कारण बताते हुए रेलवे बोर्ड के सदस्य (यातायात) देवी प्रसाद पांडे ने कहा, ‘हमने बड़े स्टेशनों पर टिकट जांच का काम तेज कर दिया है. अधिक काउंटर खोलकर और अधिक कर्मचारी तैनात कर इस बात के प्रयास किए जा रहे हैं कि लोगों को आसानी से टिकट उपलब्ध हो जाए.’

टिकट जांच का काम तेज करने के साथ ही रेलवे संक्षिप्त यात्रा के लिए और अधिक स्टेशनों पर टिकट बिक्री मशीन लगा रहा है. पांडे ने कहा, ‘हालांकि, डिब्बे पूरी तरह भरे रहते हैं, लेकिन टिकट बुकिंग इससे मेल नहीं खाती.’ उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं होना चाहिए क्योंकि सभी ट्रेनें पूरी तरह भरकर चल रही हैं.’

यह पूछे जाने पर कि क्या किराए में वृद्धि और आर्थिक मंदी से यात्रियों के आवागमन पर प्रतिकूल असर पड़ा है, पांडे ने कहा, ‘सड़क मार्ग से यात्रा ट्रेन से महंगी है और देश में आम लोग यात्रा के लिए ट्रेन को तरजीह देते हैं.’ पांडेय ने कहा कि जहां तक आर्थिक मंदी की बात है, ‘तो एकमात्र यही कारण नहीं है. मुसाफिर ट्रेनों में सफर कर रहे हैं और टिकट खरीदने के लिए लंबी कतारें लगी रहती हैं.’ लंबी दूरी की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग में कमी नहीं आई है. छोटी दूरी की यात्रा के लिए टिकट बुकिंग में कमी देखी जा रही है.

पांडे ने हालांकि, स्थिति सुधरने की उम्मीद जताई. उन्होंने कहा, ‘आगामी महीनों में टिकट बुकिंग में सुधार होगा और विभिन्न कदमों की वजह से इस महीने वृद्धि रुझान दिखने भी लगा है.’

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