उपवास जो देश की आजादी की लड़ाई के दौरान ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ महात्मा गांधी का मुख्य हथियार होता था वही उपवास आज के दौर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के लिए राजनीतिक हित साधने का औजार बन गया है.
9 अप्रैल को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने दलितों के समर्थन में और समाज के विभिन्न वर्गों में सौहार्द के नाम पर देशभर में उपवास रखा था. वहीं, बीजेपी ने विपक्ष की ओर से संसद नहीं चलने देने के विरोध में गुरुवार को देशभर में उपवास रखा.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 9 अप्रैल को राजघाट पर उपवास के लिए बैठे, लेकिन दिल्ली कांग्रेस के कुछ नेताओं की उपवास से पहले छोले-भटूरे खाने की तस्वीर ने उस उपवास का उपहास बना कर रख दिया.
कांग्रेस के उपवास में हुई किरकिरी को देखते हुए बीजेपी बहुत सतर्क रही. पार्टी के उपवास में कहीं से कोई गलत संदेश ना जाए, इसके लिए पूरी सावधानी बरती गई. उपवास को देशभर में सफल बनाने के लिए बाकायदा प्लानिंग भी की गई और केंद्रीय मंत्रियों को देश के कोने-कोने में भेजा गया.
दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बेंगलुरु से लेकर पटना तक तमाम केंद्रीय मंत्री उपवास में लीन दिखे. दिल्ली के हनुमान मंदिर में भी केंद्रीय मंत्रियों का तांता लगा. यहां पहुंचने वालों में स्मृति ईरानी, मेनका गांधी, विजय गोयल, सुरेश प्रभु, नरेंद्र सिंह तोमर शामिल थे.
पार्टी नेता उपवास पर बैठे तो समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता भी अनुशासन में दिखे. हालांकि दर्जनों ऐसे लोग भी थे जिनको खाली कुर्सियां भरने के लिए लाया गया था. इस मौके पर केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और बीजेपी सांसद ने कांग्रेस पर निशाना साधने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने संसद को चलने ना देकर देश का पैसा बर्बाद किया और तमाम अहम बिल पास नहीं हो पाए, उसी के विरोध में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने देश भर में उपवास रखा है.
बीजेपी ने सोची समझी रणनीति के दिल्ली में उपवास की जगह के लिए चांदनी चौक के टाउन हॉल की जगह हनुमान मंदिर को चुना. आसपास जो खाने-पीने की दुकानें थी वो भी बंद दिखीं. आम तौर पर गुरुवार को ये दुकानें खुली रहती हैं.
कांग्रेस के उपवास की पोल खोलने वाले हरीश खुराना आज के उपवास के लिए बीजेपी की जी खोल कर तारीफ करते नजर आए. खुराना ने कहा, 'भाजपाइयों को उपवास उपवास करना आता है. आध्यात्मिक शक्ति वालों को किसी पाखंड की जरूरत नहीं.'
बीजेपी के उपवास के दौरान पार्टी कार्यकर्ता अनुशासित होकर गंभीरता से अपने नेताओं के भाषण सुनते नजर आए. इनमें से कुछ ऐसे भी थे जिनको शायद कुर्सियां भरने के लिए लाया गया था. ना तो उनका उपवास से कोई वास्ता था और ना उन्हें ये पता था कि किस मुद्दे पर उपवास रखा जा रहा है.
ऐसे ही एक शख्स सुरेश थे जिन्हें 30 और लोगों के साथ गुड़गांव से लाया गया. सुधीर गुड़गांव के सेक्टर-12 में रहते हैं और उनके घर में बिजली नहीं आती है. इस वजह से परेशान सुरेश को बताया गया कि उनकी समस्या का समाधान यहां आने से हो जाएगा. इसी के चलते वो अपने साथियों के साथ दिल्ली में बीजेपी के उपवास स्थल तक आ गया.
बहरहाल, उपवास को लेकर सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस में इस राजनीतिक रस्साकशी का अंत नजर नहीं आता. दोनों एक-दूसरे पर पत्थर फेंकने में लगे हैं, लेकिन यह भूल रहे हैं कि कांच की दीवारें दोनों ओर से चटखने का डर रहता है.