अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने वाली फर्म 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' को लेकर भारत में भी विवाद शुरू हो गया है. भारत के दो शीर्ष राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर चुनावों में इस फर्म का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं.
भारत सरकार में आईटी और कानून मंत्री और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सवाल किया कि 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सोशल मीडिया प्रोफाइल के बीच क्या संबंध है? उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल करेगी?
उन्होंने पूछा, 'कांग्रेस ने 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' के सीईओ को कितने भारतीयों का डेटा दिया है? इंग्लैंड और अमेरिका में इस कंपनी पर डेटा चोरी के गंभीर आरोप हैं. इस कंपनी ने नाइजीरिया, कीनिया, ब्राजील और भारत में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की थी.'Will Congress Party depend on data theft and manipulation to win elections? What is the role of Cambridge Analytica in social media profile of Rahul Gandhi? : Ravi Shankar Prasad, Union Minister of Electronics and Information Technology pic.twitter.com/OgCfg7O91N
— ANI (@ANI) March 21, 2018
रविशंकर प्रसाद ने इसके साथ ही कहा कि अगर फेसबुक ने भारत में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश की तो फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग को भारत में तलब किया जाएगा.
रविशंकर प्रसाद के आरोपों के जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के 'गैरकानूनी' कानूनी मंत्री रविशंकर प्रसाद अपनी पार्टी बीजेपी की आदत की तरह फिर से गलत आरोप लगा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस या कांग्रेस अध्यक्ष ने कभी 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' नाम की कंपनी को हायर नहीं किया है. केंद्रीय कानून मंत्री सफेद झूठ बोल रहे हैं और फेक एजेंडा फैला रहे हैं.BJP's factory of fake news has produced one more fake product today. It appears fake statements, fake press conferences & fake agendas have become everyday character of BJP and its 'Lawless' Law Minister Ravi Shankar Prasad: Randeep Surjewala, Congress pic.twitter.com/dzA8JMA3Lr
— ANI (@ANI) March 21, 2018
सुरजेवाला ने कहा, 'कैम्ब्रिज एनालिटिका से संबंधित वेबसाइट दिखाती है कि 2010 में बीजेपी-जेडीयू ने इसकी मदद ली थी. इस फर्म की भारतीय पार्टनर कंपनी OBI को बीजेपी के सहयोगी दल के सांसद के बेटे चला रहे हैं और 2009 में बीजेपी नेता राजनाथ सिंह ने भी इस कंपनी की मदद ली थी.'
कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रभारी दिव्या स्पंदना राम्या ने कहा कि कांग्रेस का 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' के साथ किसी तरह का जुड़ाव झूठी खबर है.उन्होंने एक और ट्वीट करके सवाल किया कि क्या बीजेपी और पीएम मोदी साफ करेंगे कि उनका 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' से क्या संबंध है?News about Congress engaged/engaging with Cambridge Analytica is absolutely false.
— Divya Spandana/Ramya (@divyaspandana) March 21, 2018
दिव्या ने पीएम नरेंद्र मोदी और फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग की मुलाकात की एक पुरानी फोटो भी ट्वीट की.Can the @BJP4India @narendramodi clarify if they’ve engaged Cambridge Analytica?
— Divya Spandana/Ramya (@divyaspandana) March 21, 2018
Can @narendramodi tell us what the deal was with Mark Zuckerberg and Cambridge Analytica? pic.twitter.com/GLHe13i86S
— Divya Spandana/Ramya (@divyaspandana) March 21, 2018
अमेरिका में लगे हैं गंभीर आरोप
आपको बता दें कि 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' पर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में करीब 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारी चुराकर ट्रंप की मदद करने के आरोप हैं. इस जानकारी का ट्रंप के विरोधी दलों की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल किया गया. इसे फेसबुक के इतिहास का सबसे बड़ा डेटा लीक कहा जा रहा है.
ऐसी खबरें आ चुकी हैं कि ये कंपनी भारत में कई राजनीति दलों के लिए काम करती रही है. चौंकाने वाली खबर तो यह भी आ रही है कि एनालिटिका विरोधियों की छवि खराब करने के लिए हनीट्रैप और घूसखोरी तक का सहारा लेती है.
ऐसे काम करती है फर्म
आपके पास फेसबुक के माध्यम से तमाम दिलचस्प ऐप की रिक्वेस्ट आती होंगी. इनको डाउनलोड करने के लिए आपके पर्सनल डेटा को हासिल करने की इजाजत मांगी जाती है. डेटा चुराने का पूरा खेल यहीं से शुरू होता है. यह कंपनी किसी के अकाउंट की जानकारी लेकर उसके दोस्तों की भी जानकारी हासिल कर लेती है.
काफी देशों में है सक्रिय
यह फर्म भारत समेत कई देशों में सक्रिय है, लेकिन इस कंपनी की अबतक की सबसे बड़ी उपलब्धि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप के लिए काम करना है. माना जाता है कि कंपनी ने बिना किसी खास झुकाव वाले वोटर्स की पहचान की और उन्हें ट्रंप के पक्ष में करने में अहम भूमिका निभाई.
घूसघोरी और हनीट्रप का सहारा
ब्रिटेन के अखबार गार्जियन द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में फर्म के शीर्ष अधिकारियों ने स्वीकार किया कि वे अपने क्लाइंट के विरोधी उम्मीदवारों की छवि खराब करने के लिए घूसखोरी और हनीट्रैप का भी सहारा लेते हैं. इन अधिकारियों ने बताया कि कंपनी ने अमेरिका के अलावा भारत, नाइजीरिया, केन्या, चेक रिपब्लिक और अर्जेंटीना जैसे दुनिया के कई देशों के 200 से ज्यादा चुनावों के लिए काम किया है.कांग्रेस भी साथ करने वाली थी काम?
कहा जा रहा है कि कांग्रेस 2019 के चुनाव के लिए 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' के साथ काम करने के लिए बात कर रही थी. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार भारत में कैम्ब्रिज एनालिटिका की पैरेंट कंपनी स्ट्रेटेजिक कम्युनिकेशंस लेबारेटरीज (SCL) एक स्थानीय कंपनी ओवलेनो बिजनेस इंटेलीजेंस (OBI) के साथ मिलकर काम करती है. इस कंपनी ने अपनी वेबसाइट में बताया है कि बीजेपी, कांग्रेस और जेडीयू उसके ग्राहकों में हैं.