ने विकास के दावे को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है. दिग्विजय ने कहा, ‘गुजरात हमेशा से विकास के संदर्भ में आगे रहा है. यह एक रात में नहीं हुआ है.’ तादोबा बाघ अभयारण्य के निजी दौरे पर रवाना होने से पहले सिंह संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे.
शीला दीक्षित ने बोला मोदी पर हमला
ने भी नरेन्द्र मोदी पर हमला बोलते हुए गुजरात में अपनाये जा रहे विकास मॉडल की हवा निकालने का प्रयास किया. शीला ने मोदी को न्यौता दिया कि वह स्वयं दिल्ली आकर देख लें कि ‘वास्तविक’ भागीदारी वाले लोकतंत्र का क्या मतलब होता है. मोदी के विकास एजेंडा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि वह विकास सुनिश्चित करना चाहते हैं तो उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा अपनाये जा रहे भागीदारी वाले मॉडल का अनुसरण करना चाहिए.
मोदी ने पिछले साल तीसरी बार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी को जीत दिलवायी थी और उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का मजबूत दावेदार माना जा रहा है. मोदी गुजरात में विकास के मॉडल को प्रमुखता से उठा रहे हैं.
यूपीए के प्रमुख कार्यक्रमों की आलोचना करने के लिए मोदी को आड़े हाथों लेते हुए शीला ने अपनी सरकार की भागीदारी पहल को उजागर किया. इस पहल के तहत विभिन्न विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने की निर्णय प्रक्रिया में तीन हजार से अधिक निवासी कल्याण समितियों (आरडब्ल्यूए) को शामिल किया गया है.
दिल्ली में तीन बार अपनी पार्टी को सफलता दिलवाने वाली शीला ने कहा, ‘हम जब पहली बार सत्ता में आये तो हमने महसूस किया कि हमें लोगों की आवश्यकताओं, उनकी इच्छाओं, उनकी आकांक्षाओं को समझना चाहिए. हमने महसूस किया कि आरडब्ल्यूए, महिला समूहों, व्यापारियों एवं अन्य के बिना कोई विकास नहीं हो सकता.’
नरेन्द्र मोदी मजदूरों के भक्षक
उधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी माले ने भी मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी को भले ही बीजेपी अपने प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश करे लेकिन वह अपने शासित प्रदेश में कॉरपोरेट जगत के संरक्षक और मजदूरों के भक्षक साबित हुए हैं. रांची में भाकपा माले के मंगलवार से प्रारंभ हुए 9वें महाधिवेशन के अवसर पर पत्रकार वार्ता में भाकपा माले की केन्द्रीय समिति के सदस्य स्वपन मुखर्जी ने यह बात कही.