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लंबी खिंच सकती है करेंसी नोटों की किल्लत, सालबोनी प्रेस के कर्मचारियों ने खड़े किए हाथ

इस नए घटनाक्रम से करेंसी नोटों की प्रिंटिंग और प्रोडक्शन प्रक्रिया के प्रभावित होने की संभावना है. अभी तक 4.5 करोड़ नोट दिन में छापे जाते थे जो घटकर 3.4 करोड़ रह सकते हैं.

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बढ़ सकती है लोगों की मुश्किलें
बढ़ सकती है लोगों की मुश्किलें

नोटबंदी की वजह से देशभर में करेंसी की किल्लत पहले से ही महसूस की जा रही है और अब सालबोनी स्थित करेंसी प्रिंटिग प्रेस से जो खबर आ रही है, वो और परेशानी बढ़ाने वाली है. इस करेंसी प्रिंटिग प्रेस के कर्मचारियों ने अब शिफ्ट के अलावा अतिरिक्त घंटों में काम करने से इनकार कर दिया है. इन कर्मचारियों ने साफ कहा है कि वो 12-12 घंटे तक अब और काम नहीं कर सकते हैं.

इस नए घटनाक्रम से करेंसी नोटों की प्रिंटिंग और प्रोडक्शन प्रक्रिया के प्रभावित होने की संभावना है. अभी तक 4.5 करोड़ नोट दिन में छापे जाते थे जो घटकर 3.4 करोड़ रह सकते हैं. सालबोनी स्थित करेंसी प्रिंटिग प्रेस में 700 कर्मचारी और करीब 150 अधिकारी हैं. भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से संचालित 'भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ' में कर्मचारियों के कॉन्ट्रेक्ट में हर दिन 9 घंटे काम करने की शर्त है. लेकिन नोटबंदी के ऐलान के बाद से ही ये कर्मचारी लगातार 12-12 घंटे काम कर रहे हैं. करेंसी प्रिटिंग प्रेस में अब तक 14 कर्मचारी बीमार पड़ चुके हैं. इसके अलावा कई और कर्मचारी भी काम के तनाव और मौसम के असर की वजह से खराब स्वास्थ्य की शिकायत कर रहे हैं.

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भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण कर्मचारी संघ के अध्यक्ष और तृणमूल कांग्रेस सांसद शिशिर अधिकारी ने कहा, 'कर्मचारी बीमार पड़ रहे हैं और उन्हें ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं दिया जा रहा है. हम संकट को समझते हैं. इसमें कोई राजनीति नहीं लेकिन ये मानवीय आधार पर ठीक नहीं है. कर्मचारी 12 घंटे तक काम कर रहे थे लेकिन इस तरह और आगे काम नहीं किया जा सकता. इसलिए हमने मांग की है कि कर्मचारियों के कॉन्ट्रेक्ट के मुताबिक उनसे हर दिन 9 घंटे ही काम लिया जाए.'

सालबोनी नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. यहां करेंसी प्रिटिंग प्रेस के कर्मचारियों का कहना है कि प्रेस परिसर में स्वास्थ्य की समुचित देखभाल के लिए न्यूनतम सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. यहां से निकटतम अस्पताल भी 25 किलोमीटर दूर मिदनापुर में है. कर्मचारियों का कहना है कि असम राइफल्स और कलाईकुंडा एयर फोर्स बेस से उन्हें काफी सपोर्ट मिल रही है लेकिन करेंसी प्रिंटिंग से जुड़ी जानकारी और ट्रेनिंग सिर्फ प्रेस के कर्मचारियों को ही दी जा सकती है. इसे किसी और के साथ साझा नहीं किया जा सकता है.

एक कर्मचारी ने बताया कि ओवरटाइम में काम नहीं करने से करेंसी नोटों का उत्पादन 25 फीसदी घट कर पहले के नियमित स्तर पर आ गया है. अब हर दिन करीब 3 करोड़ करेंसी नोटों का उत्पादन हो रहा है. सालबोनी करेंसी प्रिंटिंग प्रेस के इस घटनाक्रम से आशंका जताई जा रही है कि करेंसी नोटों की किल्लत और लंबे समय तक खिंच सकती है.

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