नोट बंदी की मार आज चारों ओर देखने को मिल रही है. मगर इसका असर दिल्ली के ऑटो रिक्शा, साइकल रिक्शा और ई-रिक्शा वालों पर भी खूब दिखाई पड़ रहा है.
करोल बाग में ई-रिक्शा चला रहै आशीष बताते है कि उनके पास काम की बहुत कमी हो गई है. रोजाना ई-रिक्शा किराए पर लेते हैं, जिसके लिये उन्हें 300 रु. चुकाने पड़ते हैं. इसके अलावा 150 रु. बैटरी की चार्जिंग का पैसा देना होता है. कुल मिलाकर 400-500 रु. तो रिक्शे के किराए में ही चले जाते हैं. ऐसे में रोज की कमाई नोटबंदी के बाद से आधी हो गई है. अब आशीष केवल 600-700 रु. ही रोजाना कमा पा रहे है, जिससे उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा कई बार होता है जब वो रिक्शे का किराया भी नहीं दे पा रहे हैं.
इसके अलावा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, जहां सुबह से ही ऑटो वाले भारी संख्या में नजर आते हैं, मगर नोट बंदी के बाद से ये खाली ही नजर आते हैं. ये ऑटो वाले नोट बंदी से पहले दिन के 1200-1500 रुपये कमाते थे लेकिन अब 500-700 रुपये कमा रहे हैं. कई ऑटो वालों पर नोट बंदी का असर है. उन्हीं में से एक है मनोज यादव. मनोज के दो बच्चे हैं मगर स्कूल की सही समय पर फीस न जमा कर पाने के कारण बच्चों को बोल दिया गया कि पहले फिस लाओ फिल स्कूल आओ.
अब नोट बंदी खत्म होने में बस कुछ ही दिन बाकी हैं. ऐसे में ये लोग न तो कैब की तरह पे-टीएम इस्तेमाल करते हैं और न ही कोई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन, जिसकी वजह से यात्री कैश की किल्लत के चलते कैब लेना ही बेहतर समझते हैं. अब ऑटो वालों के पास नोट बंदी के खत्म होने के इंतजार के अलावा और कोई चारा नहीं है.