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चेला कहलाने लायक नहीं केजरीवाल, कुर्सी के नशे में हैं चूर: अन्ना हजारे

एक वक्त था जब अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल मिलकर 'राइट टू रिकॉल' की वकालत किया करते थे. लेकिन अब हजारे मानते हैं कि ये अधिकार सबसे पहले दिल्ली सरकार पर लागू होना चाहिए. उन्होंने इस मामले में दिल्ली कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन की मिसाल दी जिन्होंने हार का जिम्मा लेते हुए इस्तीफा दे दिया था.

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केजरीवाल का गुरु कहलाना अपमान जैसा- अन्ना हजारे
केजरीवाल का गुरु कहलाना अपमान जैसा- अन्ना हजारे

कभी लोग उनका नाम एक साथ लेते थे. लेकिन अब अन्ना हजारे को केजरीवाल को अपना चेला कहना भी अपमानजनक लगता है. एमसीडी चुनाव के बाद रालेगण सिद्धि में अन्ना हजारे ने आजतक के साथ खास बातचीत की. बातचीत में उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा.


अन्ना हजारे का कहना था कि केजरीवाल के सीएम बनने के बाद उन्होंने सलाह दी थी कि वो दिल्ली के विकास पर ध्यान दें. लेकिन केजरीवाल ने उनकी नहीं सुनी. आम चुनाव में पटखनी खाने के बाद भी उन्होंने पंजाब, गोवा और यूपी में पार्टी के विस्तार में ज्यादा ताकत लगाई. हजारे का आरोप था कि केजरीवाल की नजर अब पीएम की कुर्सी पर है और ये दिल्ली में मिली जीत से पैदा हुए अहंकार का नतीजा है.

'केजरीवाल को कुर्सी का नशा'
हजारे ने याद दिलाया कि केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनने के बाद गाड़ी, बंगले जैसी सुविधाएं ना लेने की बात कही थी. लेकिन वो इस पर खरे नहीं उतरे. उनके मुताबिक दिल्ली के सीएम को कुर्सी का नशा हो गया है.

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अन्ना हजारे की मानें तो उन्होंने केजरीवाल को चेताया था कि पार्टी में चरित्रवान लोगों को परखना आसान नहीं होगा. लेकिन आम आदमी पार्टी ने बिना सोचे समझे सदस्यता अभियान चलाया. इसी का नतीजा है कि केजरीवाल के कई मंत्री संगीन आरोपों के घेरे में हैं.

'केजरीवाल पर राइट टू रिकॉल लागू'
एक वक्त था जब अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल मिलकर 'राइट टू रिकॉल' की वकालत किया करते थे. लेकिन अब हजारे मानते हैं कि ये अधिकार सबसे पहले दिल्ली सरकार पर लागू होना चाहिए. उन्होंने इस मामले में दिल्ली कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अजय माकन की मिसाल दी जिन्होंने हार का जिम्मा लेते हुए इस्तीफा दे दिया था. लेकिन हजारे की राय में केजरीवाल के दिमाग में सत्ता बैठी है लिहाजा वो ऐसा नहीं करेंगे.


अन्ना हजारे का कहना था कि उन्होंने अब केजरीवाल को सलाह देना छोड़ दिया है क्योंकि उनके दिमाग में पैसा और सत्ता बैठी है. उन्होंने कहा, 'अरविंद मुझे गुरु कहता है लेकिन वो मेरा चेला होने के काबिल नहीं है. इसीलिए वो मुझे कभी फोन नहीं करता और मैंने भी उसे कभी फोन नहीं किया. मुझे उसका गुरु कहना मेरे लिए अपमान जैसा है.'


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