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चीन से मुकाबला करेगी ब्रह्मोस, सुखोई और M777 हॉवित्जर की तिकड़ी

एम 777 तोपें दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हल्की हैं. इनको बनाने में काफी हद तक टाइटेनियम का इस्तेमाल किया गया है. यह 25 किलोमीटर दूर तक बिल्कुल सटीक तरीके से टारगेट हिट कर सकती है.

दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हल्की है M777 दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हल्की है M777

अमेरिका भारत को 145 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोप बेचने के लिए तैयार हो गया है. दोनों देशों की सरकारों के बीच यह करार होगा. यह डील 700 मिलियन डॉलर से ज्यादा की होगी और ज्यादातर तोपें भारत में तैयार होंगी. अभी अमेरिका एम 777 हॉवित्जर तोपों का इस्तेमाल अफगानिस्तान में कर रहा है.

हॉवित्जर में क्या है खास
एम 777 तोपें दूसरी तोपों के मुकाबले काफी हल्की हैं. इनको बनाने में काफी हद तक टाइटेनियम का इस्तेमाल किया गया है. यह 25 किलोमीटर दूर तक बिल्कुल सटीक तरीके से टारगेट हिट कर सकती है. इस तोप के ऑपरेशनल पैरामीटर की बात की जाए, तो यह खुद से 25 किलोमीटर प्रति घंटा मूव कर सकती है. यह 52 कैलिबर राउंड्स लेगी, जबकि बोफोर्स की क्षमता 39 कैलिबर की है.

चीन से निपटने में कारगर
चीन से निपटने में तो ये तोपें काफी कारगर साबित हो सकती हैं. आने वाले दिनों में भारत चीन से लगती सीमा पर अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इन तोपों को तैनात करेगा. बीएई सिस्टम के इंडिया हेड प्रतीक डबराल के मुताबिक, एम 777 हॉवित्जर का सौदा भारतीय सेना के लिए सबसे फायदेमंद साबित होगा.

1980 के बाद आर्टिलरी में शामिल नहीं हुआ नया तोप
1980 के बाद से इंडियन आर्मी की आर्टिलरी में कोई नई तोप शामिल नहीं की गई. बोफोर्स डील में हुए विवाद के बाद ये हालात बने. भारत बोफोर्स का अपग्रेडेड वर्जन धनुष नाम से भारत में तैयार कर रहा है. इसकी फाइनल ट्रायल चल रही है. 1260 करोड़ रुपये इस प्रोजेक्ट में 114 तोपों का ट्रायल चल रहा है. जरूरत 414 तोपों की है.

अमेरिका में तैयार होंगी 25 तोपें
इन तोपों की निर्माता बीएई सिस्टम्स भारत में महिंद्रा के साथ साझेदारी में 20 करोड़ डॉलर के निवेश से असेंबली इंटीग्रेशन एंड टेस्ट फेसीलिटी यूनिट स्थापित करेगी. अमेरिका से 25 तोपें बिल्कुल तैयार हालत में भारत आएंगी, जबकि बाकी को भारतीय यूनिट में मेक इन इंडिया के तहत तैयार किया जाएगा.

सुखोई फाइटर प्लेन के साथ जुड़ेगा ब्रह्मोस मिसाइल
वहीं, दूसरी तरफ ब्रह्मोस मिसाइल को सुखोई फाइटर प्लेन के साथ के साथ जोड़े जाने से हथियार को मल्टी-प्लेटफॉर्म क्षमता मिलेगी. यह भारतीय वायु सेना को दुनिया की एकमात्र ऐसी वायु सेना बना देगी, जिसके पास ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली होगी. रक्षा जानकार मेजर जनरल रिटायर्ड पी के सहगल के मुताबिक, सुखोई-30 और ब्रह्मोस का यह खतरनाक मेल वायु सेना को नई मारक क्षमता देगा.

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