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जजों की नियुक्ति के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र के बीच हुई बहस

मणिपुर के एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस लोकुर ने AG से पूछा कि फिलहाल उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की कितनी सिफारिश लंबित हैं?

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जजों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और केंद्र के बीच सीधा टकराव आज सुप्रीम कोर्ट में भी देखने को मिला. जस्टिस मदन बी. लोकुर और अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल के बीच जमकर गरमा गरम बहस हुई.

मणिपुर के एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस लोकुर ने AG से पूछा कि फिलहाल उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति को लेकर कोलेजियम की कितनी सिफारिश लंबित हैं?

अटॉर्नी जनरल ने कहा, मुझे इसकी जानकारी जुटानी होगी. जस्टिस लोकुर ने कहा कि सरकार के साथ यही दिक्कत है. मौके पर सरकार कहती है कि जानकारी लेनी होगी. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि कोलेजियम को बड़ी तस्वीर देखनी चाहिए. ज्यादा नामों की सिफारिश भेजनी चाहिए. कई उच्च न्यायालयों में 40 जजों के पद खाली हैं लेकिन कोलेजियम सिर्फ 3-4 नाम भेजता है और फिर कहा जाता है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है.

वेणुगोपाल ने कहा, यदि कोलेजियम की कोई सिफारिश नहीं है तो कुछ भी नहीं किया जा सकता. तब कोर्ट ने सरकार को याद दिलाया कि उन्हें नियुक्तियां करनी ही होंगी.

दरअसल कोलेजियम ने 19 अप्रैल को मेघालय हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए न्यायमूर्ति एम याकूब मीर और मणिपुर उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस के लिए न्यायमूर्ति रामलिंगम सुधाकर के नामों की सिफारिश की थी. वेणुगोपाल ने कहा कि दोनों की नियुक्ति के लिए जल्द आदेश जारी होंगे. कोर्ट ने कहा कि आपका जल्द का मतलब तीन महीने भी हो सकता है.

गौरतलब है कि 17 अप्रैल को मणिपुर उच्च न्यायालय से गुवाहाटी उच्च न्यायालय में एक मामले के ट्रांसफर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा जैसे उच्च न्यायालयों में हालात खराब हैं.

मणिपुर उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के सात पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल दो जज ही कार्यरत हैं जबकि मेघालय उच्च न्यायालय में चार की स्वीकृति के मुकाबले सिर्फ एक न्यायाधीश हैं. त्रिपुरा उच्च न्यायालय के चार न्यायाधीशों की स्वीकृति है पर हैं दो न्यायाधीश.

कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा की उच्च न्यायालयों में रिक्तियों के संबंध में 10 दिनों में हलफनामा दाखिल करने को कहा. बता दें कि जस्टिस के एम जोसफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की सिफारिशों पर केंद्र सरकार ने तीन महीने बाद फाइल को वापस भेज दिया था.

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