रक्षा मंत्री ए के एंटनी के आदेश के दो दिन बाद सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के खिलाफ सुकना भूमि घोटाला मामले में कोर्ट मार्शल की कार्यवाही का शुक्रवार को आदेश दिया.
तीन स्टार प्राप्त इतने वरिष्ठ अधिकारी को पहली बार इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है. मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया, ‘‘सैन्य प्रमुख ने लेफ्टिनेंट जनरल प्रकाश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है. वह सुकना भूमि घोटाला मामले में कोर्ट मार्शल की कार्यवाही का सामना करेंगे. सेना प्रमुख ने इस मामले में रक्षा मंत्री की सलाह का पालन किया है.’’ कपूर के फैसले को बुधवार को एंटनी ने पलट दिया था. उन्होंने सेना प्रमुख के करीबी समझे जाने वाले प्रकाश के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की बचाय अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.
यह पहला मौका था जब रक्षा मंत्री ने अनुशासनात्मक मामले में सेना प्रमुख के फैसले को पलट दिया. सैन्य सचिव प्रकाश 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, तो उनके खिलाफ यह कार्यवाही उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी रहेगी. प्रकाश को सुकना भूमि घोटाला मामले में तत्कालीन 33वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पी के रथ, उनके चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल रमेश हलगाली और तत्कालीन ब्रिगेडियर प्रशासन मेजर जनरल पी सी सेन के साथ जिम्मेदार पाया गया था.
कोर्ट ऑफ एन्क्वायरी में जनरल रैंक के अधिकारियों पर अभियोजन के बाद सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वी. के. सिंह, जो थलसेना प्रमुख पद के लिये नामित हैं, ने प्रकाश को सेवा से बर्खास्त करने और अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी. बहरहाल, कपूर ने रथ के कोर्ट मार्शल के आदेश देने का विकल्प चुना और अन्य को प्रशासनिक कार्रवाई के लिये कारण बताओ नोटिस जारी किया. इसके बाद एंटनी ने यह पूछा कि सैन्य कानून के तहत समान अपराध के मामले की जांच में दोषी पाये गये अधिकारियों को अलग-अलग तरह से दंडित क्यों किया गया. {mospagebreak}
एंटनी ने प्रकाश के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की ‘सलाह’ दी. यह घोटाला तब हुआ जब पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के निकट सुकना सैन्य स्टेशन से सटा 71 एकड़ भूखंड खरीदने के लिये सेना की 33वीं कोर के अधिकारियों ने निजी रिटेलर दिलीप अग्रवाल को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया. यह प्रमाण पत्र 33वीं कोर के पूर्व अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद दिया गया. अग्रवाल ने सेना को यह ‘गलत’ जानकारी दी थी कि वह अजमेर स्थित मेयो कॉलेज से संबद्ध एक शैक्षणिक संस्थान की वहां स्थापना करेंगे.
जांच में कथित तौर पर यह कहा गया कि रथ अग्रवाल के साथ उस समझौता प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने के दोषी हैं, जिसके तहत सैन्य स्टेशन में सेवारत सैन्य अधिकारियों के बच्चों को शैक्षणिक संस्थान में कुछ फीसदी सीट आवंटित करने की सहमति बनी थी. सैन्य सचिव होने के कारण प्रकाश ही थलसेना में सभी अधिकारियों की नियुक्ति और तैनाती करने के प्रभारी हैं. लिहाजा, वह थलसेना प्रमुख के एक अधिकार संपन्न सहयोगी माने जाते हैं. जनरल रैंक के अन्य अधिकारियों में से एक हलगाली की भूमिका छूट देने तक ही सीमित थी.
उन्होंने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के प्रकरण के संबंध में सैन्य स्टेशन में हो रहे घटनाक्रमों की जानकारी अपने आला अधिकारियों को नहीं दी थी. मेजर जनरल सेन वर्तमान में सेना की पूर्वी कमान के प्रमुख हैं. उन्होंने 33वीं कोर में रथ के अधीन ब्रिगेडियर (प्रशासन) के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में अग्रवाल के साथ हुई बातचीत में कथित तौर पर ‘सक्रिय भूमिका’ निभायी थी.
घोटाले के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई करने के लिये कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद प्रकाश 10 दिन की छुट्टी पर चले गये. वह इस सप्ताह की शुरुआत में अवकाश से लौटे और उन्होंने नोटिस का जवाब भी दिया. सेना के एक अधिकारी ने कहा कि यह स्वाभाविक बात है कि प्रकाश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिये आदेश जारी करने से पहले कपूर ने प्रशासनिक कार्रवाई के लिये कारण बताओ नोटिस को दरकिनार कर दिया होता. प्रकाश के कोर्ट मार्शल के ये मायने होंगे कि उन्हें अब मामले में खुद का बचाव करने का अवसर मिलेगा.
प्रकाश के उत्तराधिकारी के तौर पर थलसेना पहले ही नौंवीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जी. एम नायर की नियुक्ति कर चुकी है. नायर की सोमवार को सैन्य सचिव का पदभार संभालने की संभावना है. लद्दाख में सैनिकों के लिये फ्रोजन गोश्त और अन्य सूखा राशन खरीदने के दौरान हुई कथित अनियमितता के मामले में दो अन्य अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल एस के. दहिया और लेफ्टिनेंट जनरल एस के. साहनी के खिलाफ 2007 की शुरुआत में कोर्ट ऑफ एनक्वायरी के आदेश दिये गये थे. लेकिन सैन्य कार्रवाई के खिलाफ दोनों के उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने के बाद जांच रोक दी गयी.