पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह के खिलाफ धन शोधन और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने वाले शिवाकांत त्रिपाठी ने इस मामले में पुलिस के जांच अधिकारी द्वारा लगाई गयी फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ आज जिला अदालत में प्रोटेस्ट याचिका दायर की और कुछ सबूत अदालत में पेश किये, जिस पर मामले की सुनवाई की अगली तारीख 14 दिसंबर लगायी है.
अमर सिंह और अन्य के खिलाफ मामला दायर करने वाले त्रिपाठी ने बताया कि जिला न्यायाधीश की अदालत में आज अमर सिंह और अन्य के मामले में कानपुर पुलिस की फाइनल रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट याचिका दाखिल की है.
इसके साथ ही हमने अपनी तरफ से इस मामले में पूर्व में जांच अधिकारी रहे अधिकारी की एक रिपोर्ट भी अदालत में दाखिल की है, जिसे वर्तमान जांच अधिकारी ने अपनी लगायी गयी अंतिम रिपोर्ट में से हटा दिया था तथा अमर सिंह को ‘क्लीन चिट’ दे दी थी. उन्होंने बताया कि अदालत ने इस मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 14 दिसंबर लगायी है.
गौरतलब है कि पूर्व समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह के खिलाफ धनशोधन और धोखाधड़ी के तीन साल पुराने मामले की जांच कर रही पुलिस ने कानपुर की जिला अदालत में दो नवंबर को इस मामले की अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी और उसमें लिखा था कि इस मामले में पर्याप्त सबूत न होने के कारण इस मामले की अंतिम रिपोर्ट लगायी जा रही है.
उत्तर प्रदेश शासन के आर्थिक अपराध शाखा ने इस मामले की जांच का काम 28 अक्टूबर 2012 को कानपुर पुलिस को सौंपा था और इस मामले की जांच बाबूपुरवा पुलिस स्टेशन के क्षेत्राधिकारी को सौंपी थी. इस मामले में पर्याप्त साक्ष्य न होने की बात कहते हुये अदालत में दो नवंबर को अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी.
गौरतलब है कि कानपुर के रहने वाले शिवकांत त्रिपाठी ने 15 अक्टूबर 2009 को अमर सिंह के खिलाफ बाबूपुरवा पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, जालसाजी, आय से अधिक संपत्ति और धनशोधन का मामला दर्ज कराया था. उस समय इस मामले पर काफी हंगामा हुआ था. चूंकि मामला काफी हाईप्रोफाइल था, इसलिये जांच ईओडब्ल्यू को सौंप दी गयी थी.
अमर सिंह तथा उनके दोस्तों के खिलाफ 500 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाने वाले शिवाकांत त्रिपाठी का कहना है कि सिंह ने एक लोक सेवक होते हुये इतनी अधिक संपत्ति अर्जित की है. इसलिये उनके खिलाफ उन्होंने 1500 पन्नों के सबूतों सहित प्राथमिकी दर्ज कराई थी.
अमर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज करवाने वाले त्रिपाठी का कहना था कि सिंह ने जब राज्यसभा चुनाव लड़ा था तब उन्होंने अपनी संपत्ति 32 करोड़ रूपये घोषित की थी. बाद में उन्होंने मुलायम सरकार में उत्तर प्रदेश राज्य विकास परिषद के चेयरमैन का पद संभाला उसके बाद वर्ष 2003 से वर्ष 2008 तक उनकी संपत्ति में अभूतपूर्व इजाफा हुआ और उनकी संपत्ति 500 करोड़ रूपये के पार पहुंच गयी. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि 2003 से 2008 के बीच सिंह और उनकी पत्नी ने कथित तौर पर विभिन्न कंपनियों का एक दूसरे में विलय किया और इस तरह पांच सौ करोड़ रूपये से अधिक बनाए.