Covid-19 महामारी की शुरुआत से देश में एक राज्य केसों की कम संख्या, अधिक टेस्टिंग और कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के लिए अलग खड़ा दिखता है और वो है कर्नाटक. प्रवासियों के बड़े मूवमेंट, कई शहरी सेंटर्स और घनी आबादी वाले महानगर के बावजूद प्रतीत होता है कि कर्नाटक ने खुद को संकट के बुरे दौर से अब तक खुद को बचाए रखा. लेकिन अब जैसे कि राज्य में केसों का आंकड़ा बढ़ रहा है, कर्नाटक की मजबूत व्यवस्थाओं की भी अब परीक्षा है.
अबतक, कर्नाटक में महामारी नियंत्रण में थी. राज्य में रविवार (28 जून) की रात तक 13,190 केस और 207 मौतें रिपोर्ट हुई थीं. इसका मतलब यह था कि कर्नाटक की आबादी गुजरात से अधिक होने के बावजूद वहां की तुलना में आधे से भी कम केस दर्ज हुए. गुजरात में होने वाली मौतों की तुलना में भी कर्नाटक में मौतों का आकड़ा 1/10 हिस्सा ही रहा.

हालांकि पिछले कुछ दिनों में, कर्नाटक में केसों की संख्या में चिंताजनक ढंग से वृद्धि हुई है. रविवार, 28 जून, कर्नाटक में ऐसा पहला दिन था जब 1,000 से अधिक नए केस रिपोर्ट हुए. कर्नाटक ने राज्य में पहला केस आने के बाद 85 दिन में जितने केस जोड़े, उससे ज्यादा पिछले एक हफ्ते में ही केस सामने आ गए. कर्नाटक में केस दोगुने होने की रफ्तार हर दिन तेज हो रही है. अब राज्य में दो हफ्ते से भी कम में केस दोगुने हो रहे हैं.
अगर पिछले 7 दिन की गणना की बात की जाए तो बड़े राज्यों में सबसे तेज केस दोगुने होने की रफ्तार में कर्नाटक का नंबर तीसरा है. कर्नाटक में 13 दिन में केस दोगुने हो रहे हैं. कर्नाटक से आगे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश हैं. तेलंगाना में 7.6 दिन में और आंध्र प्रदेश में 12.4 दिन में केस दोगुने हो रहे हैं.

कर्नाटक की हालिया आंकड़ों में वृद्धि अधिकतर बेंगलुरु में केंद्रित है. रविवार को राज्य में रिपोर्ट हुए हर तीन नए केस में से दो बेंगलुरु से थे. कुल मिलाकर, कर्नाटक की इस राजधानी में राज्य के कुल केसों में से एक चौथाई दर्ज हुए हैं. वहीं राज्य में हुई हर 10 मौतों में चार से ज्यादा बेंगलुरु से हैं. रविवार को, लगभग 800 नए केसों के साथ, बेंगलुरु, देश के शहरों में सातवां सबसे अधिक नए केसों वाला शहर रहा.
कर्नाटक की सबसे बड़ी चिंता अब अकेले इसके आंकड़े नहीं बल्कि अपनी व्यवस्थाओं को बनाए रखने की होगी. अप्रैल के अंत तक, कर्नाटक का कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग में भारत में सबसे अच्छा रिकॉर्ड था. तब राज्य ने हर पॉजिटिव केस के लिए 47 कॉन्टेक्ट्स ट्रेस किए थे, जबकि राष्ट्रीय औसत सिर्फ 6 कॉन्टेक्ट्स का था. जून के मध्य तक कर्नाटक को अपने सभी केसों में से 85 प्रतिशत से ज्यादा में ट्रांसमिशन का स्रोत पता था. ये अपने आप में इसकी तेज कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग का सबूत था. लेकिन आंकड़े बढ़ने के साथ इस व्यवस्था के चरमराने का खतरा बढ़ रहा है.

पिछले हफ़्ते एक तिहाई केसों के ट्रांसमिशन का स्रोत नहीं पता चल सका क्योंकि केसों की संख्या बढ़ गई थी. ऐसे केसों में जहां ट्रांसमिशन के स्रोत की पहचान की जा सकती है, और बाहर से आने वाले यात्रियों की हिस्सेदारी घटी है तो ये स्थानीय तौर पर वायरस के फैलने का संकेत है. अब राज्य केसों के तेजी से बढ़ने वाली स्थिति में हैं तो ऐसे में इसके सिस्टम की असली परख होगी.