कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए सरकार ने 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है. 21 दिनों तक घर में बंद रहने का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इस पर चिंताएं जाहिर की जा रही हैं. अभी इस लॉकडाउन के सात दिन गुजरे हैं और दो हफ्ते बाकी हैं, जब लोग कोरोना वायरस फैलने से रोकने के लिए घरों में बंद रहेंगे.
हालांकि, किसी परिस्थिति का मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह हर व्यक्ति की ग्रहणशीलता के आधार पर तय होता है क्योंकि हर व्यक्ति का व्यवहार अलग-अलग हो सकता है.
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बीएलके अस्पताल के कंसल्टेंट मनोचिकित्सक डॉ. मनीष जैन का कहना है, "हालांकि, यह कठिन समय है लेकिन बतौर डॉक्टर मैं कुछ ऐसी सलाह दूंगा जिससे कि इस परिस्थिति से निपटने में आसानी हो. चूंकि हमारे पास बहुत समय है इसलिए इस टाइम का सकारात्मक रूप से सदुपयोग करने की जरूरत है. सोने और खाने का समय जरूर तय होना चाहिए. कुछ ऐसे खेल जो घर के अंदर खेले जा सकें और व्यायाम आपको अपनी ऊर्जा बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं. यह समय बच्चों के लिए भी काफी कठिन है, इसलिए बच्चों के साथ अच्छा एवं खुशनुमा समय बिताकर इस चुनौती को आसान किया जा सकता है."
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बड़े पैमाने पर परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य पर लॉकडाउन का क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका विश्लेषण करने के लिए इंडिया टुडे की टीम ने दिल्ली के आदर्श नगर का दौरा किया.
यहां के निवासी महावीर सिंह ने बताया, "देखिए, यह इस पर निर्भर करता है कि आप अपना समय और ऊर्जा कैसे इस्तेमाल करते हैं. सबसे कठिन है घर में बच्चों को संभाल कर रखना, क्योंकि उनमें बहुत ऊर्जा और चंचलता होती है. मैंने तय किया है कि यह समय घर में खेले जा सकने वाले खेलों में बिताया जाए. मैंने अपने पुराने बोर्ड गेम वापस निकाल लिए हैं और बच्चे उसी में उलझे रहते हैं. अभिभावक के रूप में हमें बच्चों के साथ थोड़ा स्मार्ट होने की जरूरत है."
मेंटल हेल्थ एंड बिहैवियरल साइंसेज फोर्टिस नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के डिपार्टमेंट डायरेक्टर डॉ. समीर पारिख के अनुसार, "यह एक अभूतपूर्व स्थिति है, जिससे पूरी दुनिया गुजर रही है. हालांकि, मैं लोगों से कहना चाहूंगा कि हल्के तनाव, चिंता और हमारे परिजनों के लिए सुरक्षात्मक प्रवृत्ति बिल्कुल सामान्य बात है. ऐसी परिस्थिति में चिंता करना कोई समस्या नहीं है. हालांकि, हमें इसे सकारात्मकता और रचनात्मकता से जोड़ने के तरीके खोजने होंगे. घबराहट और चिंता कम करने के लिए, सरकार द्वारा जारी होने वाले मेडिकल बुलेटिन से ही चिकित्सकीय जानकारी लेनी चाहिए. अधूरी और खराब जानकारी केवल आपके तनाव को बढ़ाएगी."
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उन्होंने कहा, "सकारात्मकता अपनाइए और घर से काम करने वालों को अपनी टाइमिंग ठीक करनी चाहिए जैसे कि पहले थी. अपने फॉर्मल कपड़े पहनें जो आप काम खत्म करने के बाद पहनते हैं, अपने शौक पर अमल करें, मनोरंजन और मानसिक विकास पर ध्यान देकर अपनी रचनात्मकता बढ़ाएं. बच्चों के लिए जरूरी है कि उन्हें घर के अंदर खेले जा सकने वाले बोर्ड गेम में बिजी रखा जाए. इसके अलावा जानकारी और बुद्धि बढ़ाने के लिए पढ़ाई और साथ-साथ समय के उपयोग के बीच एक सकारात्मक सामंजस्य स्थापित किया जाना चाहिए."