scorecardresearch
 

विपक्ष की एकता में छिपा है राहुल की जीत का मंत्र, खुद करनी होंगी ये 6 कोशिशें

गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी आए, बीजेपी को साधने के लिए और सबसे पुरानी पार्टी का गौरव फिर से वापस लाने के लिए राहुल गांधी को खासी मेहनत करनी होगी, जिसका ट्रेलर उन्होंने गुजरात में दिखा दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बीजेपी और पीएम मोदी को मात देने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने ही होंगे.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी

राहुल गांधी कांग्रेस उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बन गए. राहुल ने औपचारिक तौर पर 16 दिसंबर, 2017 को अध्यक्ष पद की कमान संभाल ली. इस नई जिम्मेदारी को ग्रहण करते ही राहुल ने साफ कर दिया कि वे अब पार्टी में तमाम बदलाव के साथ ही बीजेपी के हर वार का करारा जवाब देंगे. हालांकि राहुल के लिए ये सफर आसान नहीं होगा क्योंकि उनके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह जैसी शख्सियत हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नेटवर्क है.

गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे जो भी आए, बीजेपी से मोर्चा लेने के लिए और सबसे पुरानी पार्टी का गौरव फिर से वापस लाने के लिए राहुल गांधी को खासी मेहनत करनी होगी, जिसका ट्रेलर उन्होंने गुजरात में दिखा दिया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए बीजेपी और पीएम मोदी को मात देने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने ही होंगे.

1. पार्टी में परिवर्तन की पहल- राहुल गांधी को पार्टी संगठन में आमूल-चूल बदलाव लाने की जरूरत होगी, ताकि नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ताओं की संख्या में भी इजाफा हो. इसके साथ ही समय-समय पर नीतिगत फैसले के दौरान उम्रदराज कांग्रेसी नेताओं के प्रतिरोध को संभालना होगा.

2. राज्य स्तर पर बढ़ाना होगा उत्साह- राज्य स्तर पर मजबूत कांग्रेसी नेताओं को पार्टी में पदोन्नति देनी होगी, ताकि जमीनी स्तर काम कर रहे कार्यकर्तओं का उत्साह बढ़े. 2019 के लोकसभा चुनाव में लोकल लेवल पर पार्टी की मजबूत स्थिति अच्छे परिणाम दे सकती है.

3. मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन- कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राहुल गांधी को अपना मजबूत नेतृत्व प्रदर्शित करने की जरूरत है और साथ ही पार्टी के भीतर आपसी मतभेद पर नियंत्रण रखना होगा.  

4. विपक्ष को एकजुट करने की चुनौती- बीजेपी के खिलाफ पूरे विपक्ष को एकजुट करने की जिम्मेदारी अब राहुल के कंधों पर है. लेकिन ममता बनर्जी, सपा, बसपा और वाम दलों को एकसाथ लाना भी एक बड़ी चुनौती होगी.

5. दमदार फैसले लेने की क्षमता- राहुल गांधी को देश के सामने अपनी निर्णय लेने की क्षमता का प्रदर्शन करना जरूरी है क्योंकि उनका मुकाबला नरेंद्र मोदी से है, जो पहले ही अपने कड़े और दमदार फैसलों के लिए जाने जाते हैं.

6. पेश करना होगा देश के लिए विजन- राहुल को देश के लिए एक आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण पेश करना होगा, उन्हें स्पष्ट करना होगा देश के लिए उनकी क्या योजना, जिस पर देश की जनता भरोसा कर सके.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें