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संघ के टेरर लिंक का प्रणब ने बढ़ाया था प्रस्ताव! RSS के कार्यक्रम में जाने से कांग्रेसी हैरान

कई कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व में ही कांग्रेस अध‍िवेशन में संघ के संगठनों के आतंकी संपर्कों के बारे में प्रस्ताव पारित किया गया था, ऐसे में उनका संघ के कार्यक्रम में जाना चकित करने वाली बात है.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अगले हफ्ते आरएसएस के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने नागपुर जा रहे हैं. इस खबर को सुनकर खुद कांग्रेस के नेता हैरान हैं. यहां तक कहा जा रहा है कि प्रणब मुखर्जी के नेतृत्व में ही संघ के संगठनों के आतंकी संपर्कों की जांच के बारे में प्रस्ताव पारित किया गया था, ऐसे में उनका संघ के कार्यक्रम में जाना चकित करने वाली बात है.

हालांकि संघ पर काफी हमलावर रहने वाले राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी के इलाज के सिलसिले में अमेरिका में हैं, इसलिए उनका नजरिया अभी तक सामने नहीं आया है.

कांग्रेस के कई नेताओं को इस पर हैरानी है कि प्रणब मुखर्जी आखिर आरएसएस के कार्यक्रम में क्यों जा रहे हैं, लेकिन इस पर खुलकर कोई बोलने को तैयार नहीं है.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नागपुर मुख्यालय जाएंगे. वह संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष में शामिल हो रहे स्वयंसेवकों को संबोधित करेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस अखबार से कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'मुखर्जी ने कांग्रेस के 2010 में बुराड़ी में हुए अधिवेशन में यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया था कि आरएसएस और उसके आनुषंगिक संगठनों के आतंकियों से संबंध की यूपीए सरकार जांच करे.'

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, ' इसके बारे में जवाब पूर्व राष्ट्रपति खुद ही दे सकते हैं. उनको निमंत्रण मिला, वह जा रहे हैं तो इसका जवाब वही दे सकते हैं.'

आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष के शिविर में शामिल होने के लिए मुखर्जी को आमंत्रण भेजा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. इस शिविर को ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैम्प यानी ओटीसी भी कहते हैं.

सूत्रों के मुताबिक वह वह नागपुर में दो दिन रहेंगे और 8 जून को वापस लौटेंगे. संघ शिक्षा वर्ग के शिविर के समापन समारोह में मुखर्जी शामिल होंगे. वह इस समारोह के मुख्य अतिथि होंगे. इस शिविर में करीब 700 स्वयंसेवक शामिल हो रहे हैं.

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शि‍ंदे ने अखबार से कहा, 'वह एक बुद्ध‍िमान व्यक्ति हैं. वह भारत के राष्ट्रपति रहे हैं. उनकी पंथनिरपेक्ष सोच है. इसलिए ऐसा नहीं लगता कि उनके वहां जाने से उनके व्यवहार में कोई बदलाव आ जाएगा.'

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