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मजबूत हुई कांग्रेस, जनादेश ने खोले महागठबंधन के द्वार

यह बात इसलिए अहम है क्योंकि समय-समय पर बीजेपी का विरोध करने वाली पार्टियां जैसे- तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा की ओर से कभी साफ तौर पर तो कभी इशारों में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एकजुट होने पर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं.

महागठबंधन में मजबूत हुई कांग्रेस महागठबंधन में मजबूत हुई कांग्रेस

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'कांग्रेस मुक्त भारत' के सपने को तोड़ दिया है. पार्टी ने छत्तीसगढ़ में दो-तिहाई से अधिक सीटें जीतते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है. वहीं, राजस्थान में भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है. मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. साफ है कि हिंदी प्रदेशों में कांग्रेस की जबर्दस्त वापसी हुई है. हालांकि, कांग्रेस को तेलंगाना और मिजोरम में हार का मुंह देखना पड़ा है.

इस जनादेश से कांग्रेस मजबूत होकर उभरी है और इससे अध्यक्ष राहुल गांधी के हौसले बुलंद होंगे. अमेठी से लोकसभा सांसद राहुल के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है क्योंकि उन्होंने 2014 के आम चुनावों से लेकर कई राज्यों में हार के बाद अब सीधे मुकाबले में पीएम मोदी और अमित शाह को पटखनी दी है. इस जीत से न सिर्फ राहुल गांधी का कांग्रेस के भीतर इकबाल मजबूत होगा बल्कि महागठबंधन की धुरी बनने से भी अब उन्हें रोकना मुश्किल होगा.

बयानों से भी मिलने लगे संकेत

जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने राहुल गांधी के समर्थन में सबसे पहले खुलकर बयान दिया है. उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी अपोजिशन की सबसे बड़ी पार्टी के नेता हैं.' महागठबंधन को लेकर भी शरद ने कहा, 'महागठबंधन कई महीनों से काम कर रहा है. साझा विरासत के नाम पर कई जगह सम्मेलन हुआ है और वह आगे बढ़कर काम करेगा.'

विधानसभा चुनाव के नतीजे अभी पूरी तरह से सामने भी नहीं आए थे कि तभी समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ट्वीट किया- 'जब एक और एक मिलकर बनते हैं ग्यारह ... तब बड़े-बड़ों की सत्ता हो जाती है नौ दो ग्यारह...' इस ट्वीट से स्पष्ट है कि अखिलेश बीजेपी विरोधी पार्टियों के एक साथ आने की हिमायत कर रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने भी कहा है कि मध्य प्रदेश में जरूरत पड़ी तो उनकी पार्टी बिना किसी शर्त कांग्रेस का समर्थन करेगी.

इस बीच, बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने बुधवार की सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मध्य प्रदेश में कांग्रेस के समर्थन का ऐलान किया है.

पहले उठते थे सवाल

यह बात इसलिए अहम है क्योंकि समय-समय पर बीजेपी का विरोध करने वाली पार्टियां जैसे- तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा की ओर से कभी साफ तौर पर तो कभी इशारों में राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दलों के एकजुट होने पर सवाल खड़े किए जाते रहे हैं.

ममता ने भी नाम तय करने का किया था विरोध

इसी साल जुलाई में मीडिया से बातचीत करते हुए ममता बनर्जी ने राहुल गांधी के नेतृत्व में अगला चुनाव लड़ने को लेकर कहा था- 'अगले लोकसभा चुनाव के लिए बन रहे महागठबंधन में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम फिलहाल तय नहीं किया जाना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो इससे क्षेत्रीय पार्टियों की एकता पर असर पड़ेगा. बीजेपी के खिलाफ सभी क्षेत्रीय पार्टियों को एक साथ आना चाहिए और देश के हित में कुर्बानी देनी चाहिए. हमें लोगों के लिए लड़ाई लड़नी है. 2019 में हम लोगों की, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए सरकार बनाएंगे.'

अखिलेश ने मुलायम को बताया था पीएम का दावेदार

इसी साल अखिलेश यादव ने बयान दिया था- 'पीएम पद के लिए नेताजी मुलायम सिंह यादव भी दावेदार हो सकते हैं. नेताजी किसानों के नेता हैं और किसानों के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता?' कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि यह समय तय करेगा. पार्टी के प्रवक्ता सुनील सिंह ने इसी साल जुलाई में कहा था, 'गठबंधन का चेहरा राहुल गांधी होंगे या कोई और, यह कांग्रेस कैसे तय कर सकती है? पीएम चेहरा कौन होगा, यह सभी दल मिलकर तय करेंगे.'

'आप' ने भी किया था विरोध

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले कहा था कि बीजेपी को हराना है तो कांग्रेस को वोट न करें.

मायावती ने भी कांग्रेस के खिलाफ किया था गठबंधन

मायावती ने भी कभी राहुल गांधी के नेतृत्व को खुलकर नहीं स्वीकारा है. उन्होंने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाया था और अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन कर लिया था. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस पर भी हमला बोलला था. उन्होंने तेल के बढ़े दाम पर बीजेपी के साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की गलत आर्थिक नीतियों को मोदी सरकार ने आगे बढ़ाया, जिसकी वजह से आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा इजाफा हुआ है.

मतलब साफ है कि नतीजे आने से पहले राहुल गांधी के नेतृत्व या 2019 में पीएम पद के लिए उनकी दावेदारी के समर्थन में बीजेपी विरोधी पार्टियां साफ बयान नहीं दे रही थीं.

... लेकिन अब आगे नजर आ रहे राहुल

लेकिन राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं. अब कांग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन ज्यादा स्पष्ट तौर पर आकार ले सकता है. और इसकी अगुवाई करने में राहुल गांधी सबसे आगे खड़े नजर आ रहे हैं.

बीजेपी विरोधी पार्टियों की धुरी बनेंगे राहुल!

देश में बीजेपी के अलावा कांग्रेस ही ऐसी पार्टी है, जिसके कार्यकर्ता भारत के सभी राज्यों में हैं. इस मोर्चे पर कांग्रेस ही बीजेपी के मुकाबले खड़ी नजर आती है. उसकी मौजूदगी सार्वदेशिक है. कांग्रेस के अलावा विपक्ष की किसी भी पार्टी की मौजूदगी पूरे देश में नहीं है. यह स्थिति पहले भी थी. लेकिन बीजेपी के हाथों कांग्रेस को लगातार मिलती हार की वजह से बीजेपी विरोधी पार्टियां राहुल गांधी के नेतृत्व में खड़ी नहीं होना चाहती थीं.

वहीं, ज्यादातर राज्यों में मिलती हार की वजह से कांग्रेस भी इस बात को लेकर खुलकर दबाव नहीं बना पा रही थी कि सहयोगी पार्टियां महागठबंधन में राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारें. लेकिन अब इस बात के पूरे आसार हैं कि तीन राज्यों में मिली जीत के बाद राहुल गांधी की ओर से महागठबंधन का नेतृत्व करने और 2019 में उनकी पीएम पद की दावेदारी को लेकर कांग्रेस ज्यादा मुखर होगी.

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