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कोयला घोटाला: केंद्र सरकार से SC ने पूछा, किस आधार पर हुए आवंटन

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन के केंद्र सरकार के फैसले को मंगलवार को मनमाना करार देते हुए कहा कि इसके लिए जो प्रक्रियाएं अपनाई गईं, वे प्रथम दृष्टया कानून-सम्मत नहीं लगतीं. अगर सही प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं किया गया है तो ये आवंटन रद्द किए जाएंगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन के केंद्र सरकार के फैसले को मंगलवार को मनमाना करार देते हुए कहा कि इसके लिए जो प्रक्रियाएं अपनाई गईं, वे प्रथम दृष्टया कानून-सम्मत नहीं लगतीं. अगर सही प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं किया गया है तो ये आवंटन रद्द किए जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को भी निर्देश दिया कि वह इस मामले की जांच से संबंधित सूचना 'राजनीतिक कार्यकारियों' (केंद्र सरकार) से साझा न करे. गौरतलब है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए उचित प्रक्रिया न अपनाए जाने के कारण सरकारी खजाने को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

न्यायमूर्ति आर. एम. लोढ़ा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, 'यदि केंद्र सरकार ने कोयला ब्लॉक आवंटन के आवेदकों के साथ दिशा-निर्देशों या प्रक्रियाओं का अनुपालन नहीं किया है और ए, बी, सी को आवंटन कर दिया गया, लेकिन डी, ई, एफ को इससे दूर रखा गया तो पूरा आवंटन रद्द होगा.'

कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले वह कोयला ब्लॉक आवंटन की वैधता की जांच करेगा और फिर सीबीआई यह देखेगा कि क्या कोयला ब्लॉक के आवंटन में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है?

कोर्ट ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा तथा गैर-सरकारी संगठन कॉमन कॉज की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया. याचिका में कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द करने की मांग की गई थी.

केंद्र सरकार का बचाव करते हुए हालांकि महान्यायवादी जी. ई. वाहनवती ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन में सभी नियमों का अनुपालन किया गया और केंद्र सरकार बड़े पैमाने पर आवंटन रद्द करने के पक्ष में नहीं है.

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