सुप्रीम कोर्ट ने माता पिता के बीच संतान के संरक्षण की लड़ाई में चार साल की बच्ची को ‘शटल कॉक’ की तरह इस्तेमाल करने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर नाराजगी जाहिर की है. शीर्ष कोर्ट ने कहा है, 'छोटी बच्ची चल संपत्ति नहीं है.'
प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि जिस तरह से हाई कोर्ट ने इस मामले को लिया है उससे वे दुखी हैं. बच्ची को 'शटल कॉक' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है कि चार दिन वह मां के पास रहेगी और फिर तीन दिन पिता के पास रहेगी. न्यायालय ने कहा कि इस व्यवस्था से वह संतुष्ट नहीं है और इसमें सुधार की आवश्यकता है. न्यायालय ने पुत्री के संरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की.
इस मामले में मां का आरोप है कि उसका पति बच्ची को जबरन छीन ले गया है. इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुये अदालत ने कहा कि बच्ची को सोमवार को पेश किया जाये.
इस बीच, न्यायालय ने बच्ची के संरक्षण के विवाद को हल करने के लिये शीर्ष अदालत की दो महिला वकीलों माधवी दीवान और वी मोहना को मध्यस्थ नियुक्त किया है. न्यायालय ने कहा कि दोनों वकील छोटी बच्ची के साथ बैठकर उससे बातें करेंगे और वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिये इस बच्ची को अपने साथ कहीं भी ले जाने के लिये स्वतंत्र हैं. इसके बाद सुनवाई न्यायाधीश के चैंबर में होगी.