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गायब है महात्मा गांधी की हत्या की अंतिम चार्जशीट

यह दिलचस्प भी है और दुर्भाग्य भी कि जिस देश में नेता से लेकर हर अधिकारी बात-बात पर महात्मा गांधी का जिक्र करते हैं, उसी देश के पास अपने बापू की हत्या से संबंधि‍त अंतिम चार्जशीट नहीं है. खास बात यह कि ऐसी स्थि‍ति तब है, जब देश में गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अभि‍लेखागार के अलावा गांधी को समर्पित दो सरकारी संस्थान अलग से हैं.

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30 जनवरी 1948 को हत्या के बाद गांधी जी का शव 30 जनवरी 1948 को हत्या के बाद गांधी जी का शव

यह दिलचस्प भी है और दुर्भाग्य भी कि जिस देश में नेता से लेकर हर अधिकारी बात-बात पर महात्मा गांधी का जिक्र करते हैं, उसी देश के पास अपने बापू की हत्या से संबंधि‍त अंतिम चार्जशीट नहीं है. खास बात यह कि ऐसी स्थि‍ति तब है, जब देश में गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अभि‍लेखागार के अलावा गांधी को समर्पित दो सरकारी संस्थान अलग से हैं.

मामले में इस बड़ी चूक का खुलासा तब हुआ है, जब करीब सात दशकों के बाद गांधी की हत्या से संबंधि‍त दस्तावेजों को केंद्रीय सूचना आयोग ने सार्वजनिक करने का निर्देश दिया. सीआईसी ने 25 जून 2015 को केंद्रीय गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि महात्मा गांधी की हत्या के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज FIR और आरोप पत्र को सार्वजनिक किया जाए. यह निर्देश ओडिशा के बोलांगीर जिले के निवासी हेमंत पांडा के आग्रह पर आया है.

पांडा ने गृह मंत्रालय में सात सूत्रीय आवेदन देकर बापू की हत्या की प्राथमिकी, आरोप पत्र सहित अन्य जानकारी मांगी है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या कानून के अनुसार बापू की पार्थिव देह का पोस्टमार्टम किया गया था. मंत्रालय ने यह आवेदन भारतीय अभिलेखागार, दर्शन समिति और गांधी स्मृति के निदेशक के पास भेजा. गांधी स्मृति को पहले बिड़ला हाउस कहा जाता था, जहां बापू ने आखिरी दिन बिताए थे और जहां उनकी हत्या की गई थी.

नहीं हुआ था बापू का पोस्टमार्टम
राष्ट्रीय अभिलेखागार ने पांडा को सूचित किया है कि वह पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट 1993 और पब्लिक रिकार्ड रूल्स 1997 के प्रावधानों के तहत रखी आवश्यक सूचना हासिल करने के लिए उनके कार्यालय आ सकते हैं. गांधी स्मृति और दर्शन समिति ने उन्हें सूचित किया है कि बापू के परिवार वालों की इच्छा के मुताबिक पोस्टमार्टम नहीं किया गया था. गांधी स्मृति और दर्शन समिति ने पांडा को यह भी बताया कि 30 जनवरी 1948 को हुई महात्मा गांधी की हत्या के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी और आरोप पत्र के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

जवाब में गांधी स्मृति ने कहा है कि तुगलक रोड पुलिस थाने ने हत्या के बाद प्राथमिकी दर्ज की और जांच की थी. सूचना आयुक्त शरद सभरवाल ने बताया कि अपीलकर्ता के मुताबिक, उसने गृह मंत्रालय से सूचना मांगी और उसे वह सूचना मुहैया करानी चाहिए. उनके अनुसार, इसके बाद हमने गृह मंत्रालय के सीपीआईओ को एक बार फिर यह जांच करने के लिए कहा कि क्या प्वॉइंटर नंबर-1 (प्राथमिकी एवं आरोपपत्र) के संदर्भ में कोई सूचना उसके पास या तुगलक रोड पुलिस थाने के पास है.

सभरवाल ने कहा कि अगर गृह मंत्रालय या तुगलक रोड पुलिस थाने में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है तो मंत्रालय का सीपीआईओ पांडा को लिखित में जवाब देगा. उन्होंने बताया कि आयोग के उपरोक्त आदेशों का पालन गृह मंत्रालय के सीपीआईओ को आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर करना है. सभरवाल ने यह भी बताया कि पांडा को राष्ट्रीय अभिलेखागार में उनके रिकॉर्ड देखने की पेशकश संबंधी सुविधा का लाभ उठाने की छूट है.

पुलिस रिकॉर्ड में क्या है...
दिल्ली पुलिस की रिकॉर्ड बुक के मुताबिक, 30 जनवरी 1948 को शाम करीब 5 बजकर 10 मिनट पर महात्मा गांधी को तीन गोलियां मारी गई थीं. बिड़ला हाउस में हिंदू दक्षिणपंथी उग्रवादी नाथूराम गोडसे ने बापू पर गोलियां चलाई थीं. तब बापू दैनिक प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए जा रहे थे. गोडसे सहित आठ लोगों पर बापू की हत्या का आरोप लगा. लाल किला में विशेष अदालत में सुनवाई के बाद गोडसे और उसके साथी नारायण आप्टे को मौत की सजा दी गई और शेष को उम्र कैद हुई. मामले में विनायक सावरकर को बरी कर दिया गया.

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