scorecardresearch
 

भूमि अधिग्रहण विधेयक को कैबिनेट की हरी झंडी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आखिरकार विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक को हरी झंडी दे दी. विधेयक में निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण होने पर क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोगों की सहमति लेने का अनिवार्य प्रावधान किया गया है.

Advertisement
X
मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आखिरकार विवादास्पद भूमि अधिग्रहण विधेयक को हरी झंडी दे दी. विधेयक में निजी क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण होने पर क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोगों की सहमति लेने का अनिवार्य प्रावधान किया गया है.

सार्वजनिक-निजी साझीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं के मामले में क्षेत्र के 70 प्रतिशत लोगों की सहमति लेने का प्रावधान किया गया है. विधेयक के प्रारुप के अनुसार क्षेत्र के जिन लोगों की जमीन का अधिग्रहण किया जायेगा उनमें से 70 प्रतिशत की सहमति जरुरी होगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भूमि अग्रिहण विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी गई. विधेयक को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा अंतिम रूप दिया गया, जिसमें संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझावों को शामिल किया गया है.

संप्रग अध्यक्ष ने सरकार को उद्योगों और पीपीपी परियोजनाओं के लिये भूमि का अधिग्रहण करने से पहले क्षेत्र के 80 प्रतिशत भूमि मालिकों की सहमति लिये जाने का सुझाव दिया था.

Advertisement

सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी मंत्रिसमूह के उस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थी जिसमें कहा गया था कि उद्योगों एवं पीपीपी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के वास्ते जिन लोगों की भूमि का अधिग्रहण होगा उनमें से दो-तिहाई लोगों की सहमति पर्याप्त होगी.

मंत्री समूह ने निजी परियोजनाओं और पीपीपी परियोजनाओं के लिये सहमति के नियम में 67 प्रतिशत लोगों की सहमति लिये जाने का सुझाव दिया था. सरकार ने मत्रिमंडल की बैठक में कुछ मंत्रियों द्वारा कड़ी आपत्ति किये जाने के बाद अलग मंत्री समूह का गठन किया था.

ग्रामीण विकास राज्यमंत्री लालचंद कटारिया ने बुधवार को राज्यसभा को बताया कि सरकार शीतकालीन सत्र में ही लोकसभा में भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास एवं पुनर्थापना विधेयक, 2011 में आधिकारिक संशोधन पेश करना चाहती है.

कटारिया ने संवाददाताओं को यह भी बताया था कि विधेयक में इस्तेमाल नहीं की गई जमीन लौटाने का भी प्रावधान है.

भूमि अधिग्रहण कानून, 1894 में इस्तेमाल नहीं की गई जमीन लौटाने का कोई प्रावधान नहीं है.

Advertisement
Advertisement