कैबिनेट ने शुक्रवार को विवादास्पद परमाणु दायित्व विधयेक के मसौदे को मंजूरी दे दी जिसमें विपक्षी दलों की चिंताओं को दूर करने वाले प्रावधानों को शामिल करने का प्रयास किया गया है. इससे अब संसद के मौजूदा सत्र में ही इस विधेयक के पारित हो जाने का रास्ता साफ हो गया है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दो उपबंधों को जोड़ने के लिए अंतिम समय में इस्तेमाल ‘एंड’ शब्द को वाम दलों और भाजपा की आपत्ति के बाद निकाल दिया गया है.
कैबिनेट ने इस विधेयक के बारे में संसदीय समिति की ओर से संसद में दो दिन पहले पेश रिपोर्ट की लगभग सभी सिफारिशों को इसमें समाहित किया है.
सूत्रों ने बताया कि इन संशोधनों में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ऑपरेटर अपनी सहायता करने (रिकोर्स) के अधिकार की तब तक मांग नहीं कर सकता जब तक कि परमाणु हादसे के बाद पीड़ितों के दावों की पूरी क्षतिपूर्ति नहीं कर दी जाती.
संभावना है कि इस विधेयक को संसद में रखे जाने की तारीख लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बाद तय की जायेगी. विधेयक पर आम सहमति निर्मित करने की संभावनाओं को तब झटका लगा जब वाम दलों ने ‘एंड’ का जिक्र होने के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की.{mospagebreak}वाम दलों का दावा है कि दो उपबंधों के बीच शब्द ‘एंड’ का जिक्र होने से हादसा होने की स्थिति में परमाणु उपकरण के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं का दायित्व कुछ कम हो जाता है. भाजपा ने भी वाम दलों की ही तरह यह मुद्दा कल शाम सरकार के समक्ष उठाया.
विपक्षी दलों को आशंका थी कि इस शब्द के इस्तेमाल से परमाणु उपकरण के विदेशी आपूर्तिकर्ताओं का दायित्व कुछ कम हो जायेगा. इन ताजा चिंताओं के बाद सरकार के भीतर कल सलाह-मशविरे का दौर शुरू हुआ और गुरुवार शाम होने वाली कैबिनेट की बैठक को शुक्रवार सुबह तक के लिये टाल दिया गया था. सरकार के भीतर यह सहमति बनी कि समिति की रिपोर्ट के अंदर इस विशेष उपबंध के संबंध में आये सुझावों को स्वीकार नहीं किया जायेगा.
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मामलों की संसद की स्थायी समिति ने प्रस्ताव रखा था कि धारा 17 (ए) में उल्लेखित वाक्य को ‘एंड’ शब्द के साथ खत्म किया जा सकता है.