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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में मीडिया बैन पर CBI ने तटस्थ रुख अपनाया

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रेवती मोहित धीर स्पेशल सीबीआई कोर्ट के 29 नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं. 29 नवंबर के आदेश में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मामले में चल रहे ट्रायल की सुनवाई के मीडिया कवरेज पर बैन लगा दिया था.

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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में मीडिया बैन पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने तटस्थ रुख अपनाया हुआ है. जांच एजेंसी ने शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को इस बारे में जानकारी दी.

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रेवती मोहित धीर स्पेशल सीबीआई कोर्ट के 29 नवंबर के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे हैं. 29 नवंबर के आदेश में स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने मामले में चल रहे ट्रायल की सुनवाई के मीडिया कवरेज पर बैन लगा दिया था.

जस्टिस धीर ने सीबीआई के वकील संदेश पाटिल से ट्रायल का स्टेटस जानना चाहा. उन्हें बताया गया कि 31 गवाहों की गवाही हो गई है. इसके बाद उन्होंने पाटिल से पूछा कि मीडिया बैन पर सीबीआई का स्टैंड क्या है. इस पर पाटिल ने कहा, 'हमने इस केस में कोई स्टैंड नहीं लिया है. हमारा रुख तटस्थ है. इस केस के आरोपी ने इस प्रकार का आवेदन दायर किया था.'

दूसरी तरफ उदयपुर के आरोपी पुलिस इंस्पेक्टर अब्दुल रहमान की ओर से कोर्ट में पेश होने वाले एडवोकेट ने जवाब देने के लिए कोर्ट से दो हफ्ते का समय मांगा. बता दें कि रहमान के वकील ने ही निचली अदालत में आवेदन दायर किया था.

बहरहाल जस्टिस मोहित धीर ने कहा कि इस मामले में जवाब देने के लिए कुछ नहीं है और मामले में अंतिम सुनवाई 23 जनवरी को होगी. मालूम हो कि रहमान के वकील ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट में मीडिया बैन की मांग लेकर एक आवेदन दायर किया था. उनका कहना था कि मीडिया कवरेज से मामले के गवाहों और अन्य संबंधित लोगों के लिए खतरा हो सकता है.

इस आवेदन पर 12 अन्य आरोपियों के वकीलों ने भी हस्ताक्षर किए हुए हैं. आवेदन में कहा गया है कि मीडिया कवरेज से आरोपियों, अभियोजन पक्ष के गवाहों, बचाव पक्ष और अभियोजन की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. इस पर स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने डिफेंस टीम के वकीलों की सिफारिश मानते हुए आवेदन को स्वीकार कर लिया.

स्पेशल सीबीआई कोर्ट के आदेश के खिलाफ 9 अलग-अलग संगठनों के पत्रकारों ने एकजुट होकर बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की. पत्रकारों की मांग थी कि इस मामले में मीडिया कवरेज से बैन हटाया जाए. इसके साथ ही एक याचिका बृहन्नमुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट ने भी दायर की थी.

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